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दुधवा में पटरी पर लौटा पर्यटन

Wed, 02 Dec 2015 10:12 PM IST
पलियाकलां
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मुख्य सचिव के निर्देश के बाद चौथे दिन दुधवा में पर्यटन पटरी पर तो लौट आया और पर्यटक आने शुरू हो गए, लेकिन कर्मचारियों का सांकेतिक कार्य बहिष्कार जारी रहा और दफ्तरों में ताले लटक रहे।  
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फेडरेशन ऑफ फारेस्ट के कार्य बहिष्कार के कारण यहां बीते कुछ दिनों से पर्यटन ठप हो गया था और और दुधवा में सन्नाटा पसर गया था। डीडी पीपी सिंह ने मंगलवार को ही निर्देश दे दिए थे कि पर्यटकों को कोई भी असुविधा न हो। पर्यटन को लेकर कर्मचारी सहमत नहीं थे लेकिन डीडी के कहने पर पर्यटन शुरू कर दिया गया। मंगलवार की देरशाम से ही पर्यटकों का यहां आना शुरू हो गया। अलबत्ता यह संख्या उतनी नहीं थी कि जितनी पूर्व में होती थी। पर्यटकों को जंगल भ्रमण भी कराया गया। बुधवार को भी सांकेतिक कार्य बहिष्कार जारी रहा पर दफ्तरों में ताले लटकते रहे।
अब विभागीय कार्य ही बंद
कर्मियों के कार्य बहिष्कार में अब महज विभागीय कार्य ही बंद है। कर्मियों का कहना है कि वे देश हित में जंगल की पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
पर्यटक बोले, नहीं हुई कोई दिक्कत
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के भ्रमण पर आए पर्यटकों से बुधवार की सुबह ‘अमर उजाला’ ने वार्ता की और उनसे चल रहे विवाद से कोई दिक्कत होने के बारे में पूछा तो वे बोले कि उन्हें कोई भी दिक्कत पेश नहीं आई है।
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कोलकता से जंगली नाम के एनजीओ के जरिए दुधवा नेशनल पार्क भ्रमण को आए आलोक मुखर्जी ने बताया कि उनकी बुकिंग तीन चार सप्ताह पहले हुई थी और वह मंगलवार की शाम यहां पहुंचे थे। उन्हें यहां आने पर कोई भी दिक्कत नहीं पेश आई। सुबह उन्होंने जिप्सी से जंगल की सैर की और इसमें भी उनको किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। लखनऊ से परिवार के साथ आए अजय गोविल ने बताया कि पर्यटन में उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई है। अपने परिवार के साथ यहां आए पर्यटक सत्येंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्हें भी इस मसले के चलते पर्यटन में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बाघ देखने पर खुशी का इजहार किया।
डीएम के पक्ष में उतरे अधिवक्ता, प्रदर्शन
लखीमपुर खीरी। कुछ अधिवक्ता डीएम के पक्ष में उतर आए हैं। इन अधिवक्ताओं ने डीएम के पक्ष में और वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि डीएम किंजल सिंह सराहनीय कार्य कर रहीं हैं। डीएम ने गरीबों और कमजोरों की मदद कर मिसाल कायम की है। खीरी की जनता उनके साथ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग और दुधवा पार्क के अधिकारी कटान में लिप्त हैं। कार्रवाई होने के कारण वे साजिशन विरोध कर रहे हैं। दुधवा पार्क में कर्मचारियों की हड़ताल से स्थानीय जनता और पर्यटकों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि दुधवा नेशनल पार्क के हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
पर्यटन बंद रहने से बुकिंग पर पड़ा असर
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क का पर्यटन तकरीबन दो दिन प्रभावित हुआ। 29 नवंबर को कर्मचारियों ने सिर्फ कार्य बाहिष्कार किया, जबकि 30 नवंबर को पर्यटन भी बंद कर दिया। इसके चलते एडवांस बुकिंग के कारण इस पर तो असर नहीं पड़ा, लेकिन स्थानीय स्तर पर दुधवा के राजस्व को काफी नुकसान हुआ। हालांकि दो नवंबर को पर्यटन शुरू हो गया है, लेकिन इसके बाद भी इस मसले से अभी आगे भी नुकसान की आशंका है।
नवंबर और दिसंबर माह दुधवा के लिए सबसे अधिक भीड़भाड़ भरा रहता है और इसमें दुधवा दर्शन को काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। 15 नवंबर को दुधवा नेशनल पार्क के नवीन सत्र का उद्घाटन होते ही यहां पर्यटकों का जमावड़ा लग गया था। सब कुछ ठीक ठाक चल ही रहा था कि बीच में डीएम और वनकर्मियों में विवाद उभरकर सामने आ गया। इससे भी खास फर्क नहीं पड़ा, लेकिन जब कर्मियों ने 30 नवंबर को कार्य बहिष्कार के साथ पर्यटन को भी बंद कर दिया तो राजस्व को चूना लगना शुरू हो गया। पहले ही बुकिंग करा चुके पर्यटक तो यहां दिखाई दिए लेकिन नई बुकिंग न होने की सूरत में यहां सन्नाटा पसर गया। हालांकि पर्यटन को महज दो दिन बंद रहना पड़ा और अधिकारियों ने कर्मियों को मना कर काम शुरू करा दिया लेकिन इन दो दिनों में पार्क के राजस्व को लाखों रुपये का चूना लग चुका है।
आते थे रोजाना तकरीबन सौ पर्यटक
इस मसले से पहले पार्क सूत्रों के मुताबिक यहां तकरीबन सौ पर्यटक रोज आते थे। इसको सही माना जाए तो इनसे प्रवेश शुल्क के रूप में करीब दस हजार रुपये पार्क को मिलते थे, लेकिन दो दिनों में पर्यटकों की संख्या नाममात्र की ही रही, जिससे प्रवेश शुल्क में ही हजारों  रुपये का नुकसान हो गया।
पर्यटकों के न आने से रोड टैक्स को भी नुकसान
पार्क में पहुंचने वाले प्राइवेट वाहनों से रोड टैक्स के रूप में प्रति वाहन करीब तीन सौ रुपये वसूल किए जाते थे। आम दिनों ने तकरीबन 25 से 30 वाहन यहां आ जाते थे जिससे प्रति दिन इससे आय करीब 75 सौ रुपये थी लेकिन इन दो दिनों में काफी कम वाहन यहां आए और इसमें हजारों रुपये का नुकसान हुआ।
हाथी की सवारी को भी नुकसान
सलूकापुर से हाथी की सवारी कराई जाती थी और यहां मौजूद पांच हाथी करीब तीन चक्कर प्रतिदिन पर्यटकों को सैर कराते थे। प्रति चार व्यक्ति हाथी की सवारी का किराया छह सौ रुपये था। हिसाब किया जाए तो हाथी एक दिन में करीब 15 चक्कर लगाते थे और इससे करीब नौ हजार रुपये की आय प्रतिदिन थी।
गाइडों को भी नुकसान
गाइडों को भी दो दिन नुकसान का सामना करना पड़ा। पर्यटकों की संख्या कम होने के कारण बुधवार को चंद गाइड ही ले जा पाए।
जिप्सी स्वामियों को हुआ नुकसान
दुधवा में आम दिनों में करीब 15 जिप्सी पर्यटन पर निकल जाते थे, लेकिन पर्यटकों की संख्या इन दो दिनों में कम हो जाने से नाममात्र की जिप्सी ही जा पाईं। इसका नुकसान उनके स्वामियों को उठाना पड़ा है।
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