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कुछ कर गुजरने का जज्बा है मूक बधिर बच्चों में

Wed, 02 Dec 2015 10:08 PM IST
लखीमपुर खीरी
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वे भले ही बोल नहीं पाते हैं लेकिन अपनी कला के दम पर पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का साहस है शहर के मूक बधिर बच्चों में। मूक बधिर होने के बाद भी उनमें उत्साह की कोई कमी नहीं है। वे एक आम व्यक्ति की तरह भाव भंगिमाओं से अपनी बात सभी को बताते हैं। खेलों से लेकर विभिन्न कलाओं में इन बच्चों को महारत हासिल है।
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शहर के मौजी नसीरुद्दीन मेमोरियल हाल के पीछे चल रहे मूक बधिर स्कूल के बच्चों में गजब का उत्साह है। स्कूल जाने पर अन्य स्कूलों के बच्चे भले ही बोलने में संकोच करें लेकिन यह बच्चे भाव भंगिमाओं के जरिए अपनी बात बताने लगते हैं। यहां बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ पेंटिंग और खेलों तक में समान रूप से रुचि लेते हैं और जज्बा है सबसे आगे निकल जाने का। घरों में खराब हो गए सूप की तीलियों से बेहतरीन कलाकृति के बारे में पूंछा तो झट से एक बालिका उठकर खड़ी हो गई हाथों की उंगलियां चलाई और बता दिया कि उसने बनाई है। इस बच्ची का नाम सुचित्रा है। इसके बाद सुचित्रा उस हाल में ले गई जहां उसकी बनाई तमाम पेंटिंग लगी थीं। भाव भंगिमाओं के जरिए ही सुचित्रा ने बताया कि यह सभी उसी ने बनाई हैं। इन पेंटिंग में सुचित्रा की प्रतिभा के साथ उसका जज्बा भी दिख रहा था यह पूछने पर बताया कि वह इस क्षेत्र में बहुत आगे तक जाना चाहती है। सुचित्रा ने मां सरस्वती, गणेश जी और हनुमान जी के अद्भुत चित्र बनाए हैं। यह देख इसी विद्यालय की छात्रा श्रद्धा जायसवाल, स्वाती जायसवाल और शहरीन बानों ने अपनी पेंटिंग सामने रख दी जो सभी एक से बढ़कर एक थी। आगे बढ़ने पर नेहा तथा कुछ और बच्चे भाव भंगिमाओं में ही अपने डांस के बारे में बता रहे थे। इन बच्चों में भी गजब का उत्साह था। किसी सधे हुए कलाकर की तरह वे डांस की भाव भंगिमाएं प्रदर्शित कर रहे थे। बात यहीं तक नहीं समाप्त होती खेलों में भी इन बच्चों का कोई जवाब नहीं है। कबड्डी और कुश्ती से लेकर क्रिकेट तक में यह किसी से अपने को कम नहीं मानते। कुछ बच्चे अपनी कढ़ाई की हुई डिजाइन लेकर सामने थे। सभी बच्चों को चेहरे पर गजब का उत्साह था। यह बच्चे अपनी प्रतिभा का जादू दिखाने के लिए उत्सुक थे। विकलांग दिवस पर यह बच्चे सभी को संदेश देंगे कि वे बोल भले ही नहीं पाते हैं पर आगे बढ़ने का जज्बा किसी से कम नहीं है।
योजनाएं तमाम पर लाभ नहीं पा रहे विकलांग
लखीमपुर खीरी। विकलांगों के लिए योजनाएं तमाम हैं, लेकिन उनका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2014-15 में विकलांगों के लिए जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) खोला जाना था, जिसके लिए सरकार से 17.20 लाख रुपये बजट भी मिल चुका है, जिसमें विकलांगों के लिए नि:शुल्क चिकित्सीय सुविधाएं दी जानी हैैं।
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बता दें कि सरकार ने विकलांगों के लिए अस्पताल की तर्ज पर एक अलग जिला मुख्यालय पर डीडीआरसी खोलने का फैसला किया था। इसमें विकलांगों के लिए चिकित्सा, फिजियोथेरेपी आदि सुविधाएं मुहैया कराई जानी हैं। इसमें डॉक्टर समेत पैरामेडिकल स्टाफ की तैैनाती की जानी है। विकलांग कल्याण विभाग पिछले वर्ष से इसे खोलने की कवायद कर रहा है, लेकिन अभी तक इसे खोला नहीं जा सका है। बताते चलें कि जिले में 11,151 विकलांगों को पेंशन दी जा रही है। जबकि 1163 आवेदन पत्र पेंडिंग हैं। प्रभारी विकलांग कल्याण अधिकारी एवं डीडीओ अनिल कुमार ने बताया कि डीडीआरसी खोले जाने के लिए टेंडर प्रक्रिया की जा चुकी है। चुनाव समाप्त होने के बाद जिला प्रशिक्षण संस्थान में विकलांग पुनर्वास केंद्र खोला जाएगा।
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