पलिया से दुधवा जाने वाला द्वार।
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लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। इसके लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार, दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर अभयारण्य व बहराइच के कतर्निया घाट वन्यजीव विहार की वन सीमा के चारों ओर एक किमी के दायरे में औद्योगिक गतिविधियां व पक्का निर्माण समेत अन्य कई कार्य प्रतिबंधित रहेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को इसका प्रस्ताव भेजा गया था, जिसकी मंजूरी मिलने के बाद मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। टाइगर रिजर्व की सीमा के चारों ओर एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। अब इस दायरे में किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण और औद्योगिक गतिविधियां नहीं हो सकेंगी।
जारी अधिसूचना के अनुसार इको सेंसिटिव जोन में औद्योगिक इकाइयां, खनन कार्य, ईंट-भट्ठे, नए होटल, रिसॉर्ट, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान समेत बड़ी परियोजनाओं की स्थापना प्रतिबंधित रहेगी। 1285 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला दुधवा टाइगर रिजर्व का जंगल अपनी प्राकृतिक सौंदर्यता, समृद्ध जैवविविधता, नदियों और बाघों की बढ़ती संख्या के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
2022 की रिपोर्ट में दुधवा में 135 बाघ
वर्ष 2022 की टाइगर एस्टीमेशन रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 135 से अधिक बाघ पाए गए थे। एफडी डॉ. एच रजामोहन ने बताया कि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए तय मानकों के तहत होम स्टे और सीमित होटल विकास की अनुमति दी जा सकेगी। इको सेंसिटिव जोन में ध्वनि, वायु और मानव-निर्मित प्रदूषण पर सख्ती से प्रतिबंधित रहेगा। गजट में 41 बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अनाधिकृत निर्माण पर कड़ी कार्रवाई होगी।