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अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के निशाने पर दुधवा के बाघ

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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुए अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के निशाने पर हैं। इस बात की पुष्टि दो दिन पहले दुधवा नेशनल पार्क में बाघ की खाल समेत गिरफ्तार हुए शिकारियों से पूछताछ में हो चुकी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि शिकारियों ने जंगल में खाबड़ या कुड़का लगाकर बाघ का शिकार किया होगा। उसकी खाल और कीमती अंग निकालकर उसे बेचने के लिए नेपाल ले जाने की फिराक में थे, इससे पहले वन कर्मियों और एसएसबी की संयुक्त टीम ने उन्हें धर दबोचा।
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दो माह पहले भी दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर सेंक्चुरी में दो शिकारियों को पकड़ा गया था, जिनके पास से नायलॉन की रस्सी और शिकार के उपकरण बरामद हुए थे। शिकारियों के फंदे में फंसकर निकला बाघ अब भी गर्दन में फंदा लिए जंगल में घूम रहा है।
11 अगस्त 2020 को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास चरी के खेत से एक बाघिन का शव बरामद हुआ था, जिसकी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा मिला था। बाघों के शिकार की इस नई शैली को देख अफसरों के होश उड़ गए हैं।
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इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को खटीमा में भारत-नेपाल सीमा से सटे जंगल से पुलिस, एसटीएफ, एसओजी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने खीरी जिले के दो तस्करों को पकड़ा। उनके पास से व्यस्क बाघ की खाल और 8.3 किलोग्राम बाघ की हड्डियां बरामद हुईं। इनमें एक तस्कर गोला कोतवाली क्षेत्र के कमलापुर गांव का राजू और दूसरा मैलानी थाना क्षेत्र के बांकेगंज कस्बा से सटे ढ़ाका गांव का राजू था। इनके तार कुख्यात अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर तोताराम और बावरिया गैंग से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
बड़े वन्यजीव तस्कर स्थानीय लोगों से कराते हैं शिकार
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर शिकार के लिए स्थानीय और घुमंतू लोगों की मदद लेते हैं। संपूर्णानगर क्षेत्र का नरौसा गांव इस काम के लिए कुख्यात है। यह गांव बावरिया गैंग का अड्डा माना जाता है। शिकार के बाद तस्कर खाल और दूसरे कीमती अंग निकालकर नेपाल के रास्ते चीन और तिब्बत आदि देशों में पहुंचा देते हैं। कैरियर के रूप में प्राय: महिलाओं का इस्तेमाल होता है।
चीन और तिब्बत में है वन्यजीव अंगों की बड़ी मांग
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह बताते हैं कि बाघ और तेंदुए की खाल और वन्यजीव अंगों की मांग सबसे ज्यादा चीन और तिब्बत में है। इन खालों से बनी पोशाक पहनना यहां के लोग अपनी शान समझते हैं, जबकि चीन में बाघ की हड्डियों से टाइगर वाइन बनाई जाती है। अन्य कई अंग दवा बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
ररिवार को दुधवा नेशनल पार्क के बेलरायां रेंज के अंतर्गत बाघ की खाल की तस्करी के प्रयास में दो शिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके तीन अन्य साथी मौका पाकर भाग गए थे। उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। गिरफ्तार आरोपियों के पास से बाघ की एक खाल, दो मोबाइल और 18 नाखून बरामद हुए हैं। मौके पर मिले बाघ के अवशेष, बिसरा और कुछ मांस मिला है, जिसका सैंपल इकट्ठा कर जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं आईवीआरआई बरेली भेजा जा रहा है। मामले की जांच एसडीओ बेलरायां से कराई जा रही है।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
बाघ शिकार की घटना को हजम करने के प्रयास में था वन विभाग
बांकेगंज। दो शिकारियों की गिरफ्तारी के मामले को दुधवा टाइगर रिजर्व के जिम्मेदार अफसर घटना को नेपाल की तरफ होना बताने के फिराक में थे। उधर, दुधवा टाइगर के पूर्व मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक रमेश कुमार पांडेय ने बरामद खाल और गिरफ्तार हुए आरोपियों की फोटो ट्वीट कर दी, जिससे मामला खुल गया। बताया जाता है कि दोनों आरोपी बेलरायां रेंज में वन विभाग की गिरफ्त में थे। तकियापुर गांव में छापा मारने और खाल बरामदगी की घटना अभिलेखों में शनिवार शाम पांच बजे के बाद की बताई जा रही है, जबकि दुधवा के जिम्मेदार अधिकारियों ने रविवार दोपहर बाद तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। अफसरों ने अपने मोबाइल फोन तक बंद कर रखे थे। शाम को जब अफसरों के मोबाइल फोन खुले तो लोगों को जानकारी मिली। इस समय नेपाल का चितवन राष्ट्रीय निकुंज वन्यजीवों की मौत व शिकार को लेकर में चर्चा में है।
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