आंदोलन के चलते दुधवा का हाल बेहाल हो गया है और सैलानियों का यहां आना तकरीबन बंद हो गया है, लेकिन इसके बाद भी कर्मचारियों को मनाने के लिए कोई पुरजोर कोशिश नहीं की जा रही है। कर्मियों का कहना है कि उनकी मांग जब तक पूरी नहीं होती वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। बोले-पहले भी उनको समझा कर शांत करा दिया गया लेकिन दोबारा फिर वही सब हुआ।
नवंबर वर्ष 2015 में विवाद छिड़ा था और इसमें दुधवा के कर्मियों और डीडी ने डीएम पर कई गंभीर आरोप लगाए थे । इसको लेकर फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन ने आंदोलन छेड़ा था और इसको लेकर पार्क में पर्यटन भी ठप कर दिया गया था। इसमें कर्मियों को समझाकर शांत करा दिया गया था और व्यवस्था पटरी पर आ गई थी। सैलानी आ-जा रहे थे लेकिन फिर 27 जनवरी को विवाद उठा और जिप्सी चालकों, बैरियर कर्मियों ने फिर डीएम पर कई गंभीर आरोप लगाए। इसको लेकर करीब 11 दिन पूर्व फिर आंदोलन शुरू हुआ और नतीजतन पार्क का पर्यटन ठप हो गया। पर्यटन ठप होने से सैलानी लगतार वापस जा रहे हैं और इसके चलते पार्क को राजस्व को काफी चूना लग रहा है। डीडी पीपी सिंह ने कोशिश भी की थी लेकिन उनको सफलता नहीं मिल पाई और कर्मी हड़ताल पर डटे रहे। सोमवार को भी उन्होंने नारेबाजी और प्रदर्शन कर काम बंद रखे और कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार को भी दुधवा में चारों ओर सन्नाटा पसरा रहा।
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ऑन लाइन बुकिंग करने से नाराज हैं कर्मी
फेडरेशन आफ फारेस्ट ने कहा है कि सैलानियों का यहां आना ऑन लाइन बुकिंग के कारण है जो नहीं होना चाहिए था। वहां खबर कर दी गई थी लेकिन इसके बाद भी वेबसाइट पर इसे नहीं डाला गया और बुकिंग की जा रही है। कहा कि इसमें कर्मियों की कोई गलती नहीं है।