फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lakhimpur Kheri News: जैव विविधता से दुधवा मालामाल, पर चुनौतियां बढ़ीं

विज्ञापन
दुधवा जंगल में बा​घिन संग अठखेलियां करते शावक। स्रोत- वन विभाग।
विज्ञापन
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए न केवल भारतवर्ष बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। भारत-नेपाल सीमा पर विस्तृत क्षेत्र में फैला दुधवा का जंगल दुर्लभ वन्य प्राणियों से जितना मालामाल है, उतनी ही इसकी सुरक्षा को लेकर चुनौतियां भी हैं।
विज्ञापन

जंगल के कोर जोन से गुजरती रेल लाइन, जंगल की सड़कों पर तेज रफ्तार फर्राटा भरते वाहन हर साल बेजुबान जानवरों की जान ले रहे हैं। कहीं शिकार का खतरा तो कहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष में बाघ समेत दुर्लभ प्राणियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
दुधवा टाइगर रिजर्व जैव विविधता के लिहाज से पूरी दुनिया में बेजोड़ है। यहां की शीतोष्ण जलवायु दुनिया में पाए जाने वाले अधिकांश जीवों, वनस्पतियों को फलने-फूलने और बढ़ने के प्रति अनुकूल है। इसके साथ ही इन वन्य प्राणियों के लिए अनेकों खतरे वन विभाग के लिए चुनौती हैं। जंगल के अंदर से गुजरने वाले रास्ते न केवल दुर्घटनाओं का सबब बनते हैं, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतवास में भी खलल डालते हैं।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल के अंदर से कई प्रमुख रास्ते गुजरते हैं। इन पर छोटे से लेकर भारी वाहनों का भी आवागमन होता है। मैलानी-भीरा, पलिया-गौरीफंटा, पलिया-चंदनचौकी ऐसी सड़कें हैं, जो डीटीआर के कोर जोन जंगल से होकर निकली हैं। इसके अलावा बफरजोन में गोला-खुटार, भीरा-कुकरा, कुकरा-गोला रोड जैसी व्यस्त सड़कें हैं।
वन विभाग ने जंगल के इन रास्तों पर चलने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित कर रखी है। वाहन चालक इस गति सीमा का उल्लंघन करते हुए फर्राटा भरते हैं। रात के समय इन रास्तों पर आवागमन प्रतिबंधित है। फिर भी पूरी रात इन सड़कों पर आवागमन रहता है। इससे वन्यजीवों के लिए हर समय खतरा मंडराता रहता है।
अब तक बाघ-तेंदुओं समेत कई वन्यजीव हो चुके हादसों का शिकार
जंगल के रास्तों पर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर पिछले दस साल के अंदर सात बाघ और एक तेंदुए की मौत हो चुकी है। साथ ही बड़ी संख्या में हिरन, बंदर भी दुर्घटनाओं में मारे गए।
वन्यजीवों के मरने की प्रमुख घटनाएं
1997-किशनपुर सेंक्चुरी में सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
2011- पुवायां रेंज में सड़क हादसे में बाघ की मौत।
2011- भीरा-पलिया रोड पर सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिनों बाद मिला।
2011- भीरा-खुटार रोड पर वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
2012- मैलानी रेंज के महुरेना जंगल में सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिनों बाद मिला।
2012- किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी- भीरा रोड पर जुलाई में टाटा 407 की टक्कर से बाघिन की मौत।
18 जनवरी 2015- किशनपुर सेंक्चुरी में मैलानी-भीरा रोड पर कुरियानी गांव के पास वाहन की चपेट में आकर नर तेंदुए की मौत।
18 अगस्त 2017 कतर्निया घाट में गोंडा-मैलानी रेल लाइन पर ट्रेन की चपेट में आकर बाघिन की मौत।
24 जनवरी 2018- किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी-भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
09 मई 2018- इसी रेंज की मैलानी-भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर बंदर की मौत।
02 दिसंबर- 2018- इसी रेंज में मैलानी- भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
25 फरवरी 2020- दुधवा में वाहन की चपेट में आकर बंदर की मौत।
10 जुलाई 2020- दुधवा में वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
30 सितंबर 2020- मैलानी -भीरा रोड पर टूरिस्ट बस की चपेट में आकर बंदर की मौत।
16 नवंबर 2023- मैलानी रेंज महुरेना बीट जंगल से गुजरी रेल पर ट्रेन की चपेट में आकर भालू की मौत।
5 फरवरी2024- इसी रेल ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर तीन मादा चीतल की मौत।
6जून 2024- इसी रेल ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर मादा बाघ शावक घायल हुआ।

जंगल के रास्तों पर गुजरने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है। इससे अधिक रफ्तार में वाहन चलाने पर कार्रवाई की जाती है। यदि किसी वाहन से वन्यजीव दुर्घटनाग्रस्त होता है तो उसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
विज्ञापन

- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
....
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें