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Lakhimpur Kheri News: बेहतर प्राकृतवास से दुर्लभ वन्यजीवों का आशियाना बना दुधवा

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दुधवा के जंगल में शावकों संग बैठी बा​घिन। स्त्रोत- वन विभाग।
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बांकेगंज। खीरी और बहराइच जिले के 2200 सौ वर्ग किलोमीटर भूभाग पर फैला दुधवा टाइगर रिजर्व केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, दुर्लभ वन्यजीवों लिए भी दुनिया में प्रसिद्ध है। दुधवा की पारिस्थितिकी इतनी अनुकूल है कि देश के अंदर पाई जाने वाली वन्यजीवों की प्रजातियों में अधिकांश प्रजातियां यहां मौजूद हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में 66 वुडलैंड, 21 ग्रासलैंड और 13 फीसदी वेटलैंड हैं। यह सब मिलकर वन्यजीवों के प्राकृतवास के लिए अनुकूल वातावरण पैदा करता है। यहां 153 से अधिक बाघ हैं तो हिरनों की भी बड़ी संख्या है। दुधवा में एक साथ बारासिंगा, चीतल, पाढ़ा सांभर और काकड़ समेत पांच प्रजातियों के हिरन यहां पाए जाते हैं। एक साथ इतनी प्रजातियों के हिरन देश में दूसरी किसी जगह नहीं मिलते। इनके अलावा बड़ी संख्या में तेंदुए भी यहां मौजूद हैं। बाघों के भोजन के लिए हिरन ही नहीं जंगली सूअर की भी बड़ी संख्या है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में 400 प्रजातियों के पक्षी सूचीबद्ध हैं। इनमें सबसे दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन की मौजूदगी दुधवा को विशेष बनाती है। भले ही इनकी संख्या कम हो लेकिन इनका दुधवा में मौजूद रहना ही खास है। दुधवा की पारिस्थितिकी की अनुकूलता का ही यह परिणाम है कि हर साल नेपाल से बड़ी संख्या में जंगली हाथी आकर यहां प्रवास करते हैं। हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर ठंडे देशों के हजारों रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदे आकर दुधवा के जलाशयों में चार माह के लिए अपना बसेरा बनाते हैं। बड़ी संख्या में भालू भी यहां पाए जाते हैं।
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अभी हाल ही में मिला है दुर्लभ प्रजाति का आर्किड नामक पौधा
तीन साल पहले यहां ट्री फ्रॉग और दुर्लभ प्रजाति के आर्किड नामक पौधे की खोज की गई थी। हाल ही विलुप्त प्राय: प्रजाति की उड़न गिलहरी यहां मिली है। दुधवा की गेरूआ नदी में बड़ी संख्या में डॉल्फिन हैं। इसी के चलते कतर्निया घाट (वन्यजीव प्रभाग) में डॉल्फिन रेस्क्यू सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया है। यहां मगरमच्छ प्रजनन केंद्र संचालित है, जो मगरमच्छों और घड़ियालों की संख्या बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

दुधवा में फलफूल रहा गैंडों का परिवार
दुधवा में 1984 में शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना अपनी सफलता की बुलंदी छू चुकी है। पांच गैंडों से शुरू की गई इस परियोजना में संख्या बढ़कर 45 हो गई है। हाल ही में एक नर और दो मादा गैंडे को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से आजाद कर जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ा गया है।

दुधवा की अनुकूल पारिस्थितिकी के चलते यह जैवविविधता के मामले में देश का सबसे समृद्ध टाइगर रिजर्व है। यहां थलचर, जलचर और नवचर सभी प्रकार के दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। - डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व

दुधवा के जंगल में शावकों संग बैठी बाघिन। स्त्रोत- वन विभाग।

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