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जंगल की जमीन पर उगाया गन्ना खरीदा तो चीनी मिलें भी दोषी

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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की करीब नौ हजार हेक्टेयर भूमि पर भूमाफिया कब्जा कर गन्ने की खेती कर लाखों की कमाई कर रहे हैं। वन विभाग इस भूमि को खाली कराने कराने का लंबे अरसे से प्रयास कर रहा है। कभी राजनीतिक अड़ंगा तो कभी अदालती पचड़े के कारण इसमें कामयाबी नहीं मिल पा रही है। अब इसका तोड़ निकालते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने चीनी मिलों को पत्र लिखकर अतिक्रमण वाली भूमि पर उपजाया गया गन्ना न खरीदने का आग्रह किया गया है। कहा है यदि ऐसा होता है, तो संबधित चीनी मिल की संलिप्तता मानते हुए उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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डीडी बफरजोन डॉ. अनिल कुमार पटेल ने पत्र की प्रति जिले में तैनात एसएसबी की तीनों वाहिनियों के सेनानायकों को भी भेजकर आग्रह किया है कि अवैध रूप से कब्जाई वन भूमि पर उगाया गन्ना जिले की चीनी मिलों या वैक्यूम पैन क्रेशरों पर ले जाया जाता है तो संबधित व्यक्ति और वाहन को अभिरक्षा में लेकर संबधित वन क्षेत्राधिकारी सुपुर्दगी में दे दें। यही नहीं डीटीआर प्रशासन यह पत्र लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के डीएम के साथ ही इन दोनों जिलों के जिला गन्ना अधिकारियों, पलिया, गोला, निघासन और धौरहरा के एसडीएम के अलावा पीलीभीत के पूरनपुर और कलीनगर के एसडीएम को भी भेजा है।
जिले की चीनी मिलों को चार नवंबर को भेजे पत्र में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन/दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने कहा है कि बफरजोन की नौ रेंजों में कुल 71204.317 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। इसमें नौ हजार हेक्टेयर वन भूमि पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। इस भूमि पर मुख्यत: गन्ना उगाया जाता है। माफिया यह गन्ना चीनी मिलों को बेच रहे हैं, इससे राज्यहित प्रभावित हो रहा है। उपनिदेशक ने डीएम से वार्ता के बाद जिला गन्ना अधिकारी द्वारा जिले के सीनियर गन्ना विकास निरीक्षकों को पहले ही दिए जा चुके निर्देशों का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि वन विभाग की अतिक्रमित वन भूमि पर बोए गए गन्ने का सर्वे न किया जाए। राजकीय भूमि पर अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रदेश सरकार ने भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया है। इसके तहत अवैध कब्जे की भूमि पर बोया गया गन्ना न खरीद कर अतिक्रमण को हतोत्साहित किया जाए।
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डीडी बफरजोन ने पत्र के साथ बफरजोन के सभी रेंजों में वन भूमि पर अवैध कब्जे की भूमि की सूची भी भेजी है। इसमें विभागीय अधिकारियों से कहा गया है कि अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि पर उगाए गए गन्ने की आपूर्ति चीनी मिलों को न होने दें। साथ में यह भी यह भी कहा है कि यदि अतिक्रमणकारियों ने जालसाजी कर अवैध कब्जे की भूमि पर उगाए गए गन्ने का सट्टा बनवा लिया गया हो तो उसे निरस्त कराएं।
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