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हाथियों के पैरों तले रौंदे जा रहे किसानों के सपने

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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के आसपास बसे किसानों के सपने जंगली हाथियों के पैरों तले रौंदे जा रहे हैं। हाथी जंगल से निकलकर खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलों को तबाह कर रहे है। दुधवा के हाथियों के अलावा नेपाल से आने वाले जंगली हाथी भी किसानों की फसलों को मिनटों में तबाह कर डालते हैं। इस नुकसान का मुआवजा मिलने में किसानों को महीनों और कभी-कभी वर्षों लग जाएंगे।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की संख्या 80 के करीब है। दुधवा के पलिया, मझगई और बेलरायां रेंज से सटे गांवों में बसे किसान इन हाथियों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आए दिन हाथी जंगल से निकलकर खेतों में आ धमकते हैं। देखते ही देखते खेतों में खड़ी फसलों को खाने के साथ ही उसे रौंद कर तबाह कर देते हैं। हर साल सैकड़ों किसानों को हाथियों से होने वाले इस नुकसान को झेलना पड़ रहा है।
हाथी हमेशा रात में ही जंगल से बाहर निकलते हैं। जंगल से बाहर पांच से सात किलोमीटर की दूरी तय कर खेतों में पहुंच जाते हैं और किसानों की फसलों को रौंद कर सुबह होने से पहले ही जंगल लौट जाते हैं। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले मचान और झोपड़ियों को तहस नहस करना इनके स्वभाव में शामिल है। जंगल के आसपास अधिकतर छोटे किसानों के खेत हैं, जिनकी जीविका का एक मात्र साधन उनकी खेती ही है।
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किसान दिन रात मेहनत कर फसल उगाते हैं। खेतों की लहलहाती फसलों को देखकर किसान अपने भविष्य के सपने सजाते हैं। फसलों पर ही साल भर के खाने से लेकर कपड़े, घर बनाने, बच्चों की पढ़ाई और शादी ब्याह के सपने सजते हैं, लेकिन जंगली हाथी पल भर में उनके सपनों को पैरों तले रौंदकर चले जाते हैं। ऐसे में किसान केवल हाथ मलते रह जाते हैं। वन विभाग हाथियों द्वारा किए गए फसलों के नुकसान का मुआवजा देता है लेकिन यह मुआवजा मिलने में महीनों लग जाते हैं। मुआवजा भी नुकसान के अनुरूप नहीं मिल पाता है। हाथियों से बचाव के लिए वन विभाग ने कुछ हाथी प्रभावित इलाकों में खाई खोदवाई हैं तो कुछ जगह बाड़ भी लगाई जा रही है। जंगल के आसपास बसे किसानों को हाथियों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।
ये क्षेत्र हैं जंगली हाथियों से प्रभावित
दुधवा टाइगर रिजर्व के पलिया, मझगईं, बेलरायां, उत्तर निघासन, दक्षिण निघासन रेंज जंगली हाथियों से ज्यादा प्रभावित हैं। हाल के दो-तीन वर्षों से नेपाली हाथियों के झुंड आकर किशनपुर सेंक्चुरी, बफर जोन की मैलानी और भीरा रेंज के जंगल से सटे गांवों में उत्पात मचा रहे हैं। करीब बीस दिन पहले नेपाल से आए जंगली हाथी खरेहटा, सहजनिया, सोनहराभूड़, पल्हनापुर, महुरेना आदि गांवों में उत्पात मचा रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के आसपास जंगल से सटे इलाके जंगली हाथियों से प्रभावित हैं। जंगली हाथी किसानों की फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। साथ ही हाथियों से जिन किसानों की फसलों का नुकसान होता है। उस नुकसान का सर्वे कराकर उन्हें मुवावजा भी वन विभाग की ओर से दिया जा रहा है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफर जोन
हाथियों ने भीरा-पलिया हाईवे किया क्रास
बांकेगंज। किशनपुर सेंक्चुरी के मड़हा सेक्सन में कई दिनों से अपना ठिकाना बनाए नेपाल से आए जंगली हाथियों ने अब कटैया की तरफ रुख किया है। शुक्रवार की रात इन हाथियों ने भीरा-पलिया हाईवे क्रास किया है। शनिवार को इनकी लोकेशन किशनपुर सेंक्चुरी के रूट नंबर 17 में मिली है। इस बीच हाथियों ने कटैया गांव के पास पहुंचकर खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है।
निगरानी टीमों के मुताबिक, हाथियों की गतिविधियों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाथी वापसी करने के मूड में हैं, लेकिन नदी का जलस्तर अभी इतना कम नहीं हुआ है कि हाथी उसे पार कर सकें। इसलिए हो सकता है। कि कुछ दिन किशनपुर सेंक्चुरी में रहने के बाद यह फिर मड़हा लौट आएं या संपूर्णानगर रेंज होते हुए शारदा नदी का पानी कम होते ही नैपाल चले जाएं। फिलहाल निगरानी टीमें लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। संवाद
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