पसगवां थाना क्षेत्र के बरवर स्थित ओपी कांवेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल में मंगलवार दोपहर गैस रिफलिंग करते समय आग लगने से तीन वैनों के जलने के मामले में डीएम किंजल सिंह ने एआरटीओ (प्रर्वतन) को निर्देश दिए हैं कि पूरे जिले में एक अभियान चलाकर देखें कि स्कूली वाहन एलपीजी से तो नहीं चलाए जा रहे हैं। यदि चलाए जा रहे है तो उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करें। प्रगति से उन्हें एक सप्ताह के अंदर अवगत कराएं।
मालूम हो कि ओपी कांवेंट स्कूल के स्कूल वैन में गैस रिफलिंग के दौरान आग लगने से तीन वैन जलने के मामले में खंड शिक्षा अधिकारी दिनेश चंद्रा ने एबीआरसी डॉ. निर्देश वर्मा को जांच के लिए भेजा था। जांच अधिकारी ने बताया कि उन्हें स्कूल बंद मिला, जिसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। उधर एसओ रामकुमार सिंह ने बताया कि डीएम से निर्देश मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे स्कूल मालिक
चंद रुपये बचाने की खातिर स्कूली वाहन घरेलू रसोई गैस से चलाए जा रहे हैं। इससे होने वाले हादसों से नौनिहालों की जान जोखिम में पड़ती है। गैस से कई बार वाहनों के जलने के बावजूद न तो स्कूल प्रबंधकों ने सबक लिया है न ही प्रशासन चेता है।
अधिक धन कमाने की होड़ में मारुति वैन आदि वाहनों में जुगाड़ से लगाई गई गैस किट में गैस भरकर या घरेलू गैस सिलेंडर वाहन की डिग्गी में रखकर धड़ल्ले से सड़कों पर सरपट दौड़ाया जा रहा है। जिले में एक भी सीएनजी और एलपीजी की पंप नहीं है। अधिकतर स्कूलों में नन्हे मुन्ने बच्चों को लाने ले जाने के लिए वाहनों को घरेलू रसोई गैस से चलाया जा रहा है। इन वाहनों को गैस से चलाने को परिवहन विभाग से स्वीकृति भी नहीं होती है।
जानकार बताते हैं कि इनमें गैस के रिसाव से आग लगने की आशंका बनी रहती है। आग लगने पर वाहन में सवार नन्हे मुन्ने बच्चों के अलावा आस पास का क्षेत्र खतरे में पड़ जाता है। स्कूलों और यात्रियों को लाने ले जाने में तमाम वाहन घरेलू गैस से चलाए जा रहे हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि पूर्ति विभाग की ओर से
पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि जो वाहन रसोई गैस से चलता पाया जाता है
उसके स्वामी को यह बताना होगा कि उसने यह गैस किट किस एजेंसी से ली है।
संबधित एजेंसी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
एआरटीओ (प्रवर्तन) संजीव गुप्ता ने बताया कि स्कूलों को इस आशय की नोटिस
दी जा रही है कि बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने में केवल डीजल या पेट्रोल
से चालित वाहनों का ही इस्तेमाल करें। पूरे जिले में एक अभियान चलाकर यह
सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल परिसर में गैस किट वाले प्रयोग में न लाए
जाएं। इसी अभियान के तहत बुधवार को रसोई गैस से चलने वाली चार मारुति वैन
सीज की गई है। अभिभावकों को भी इस बाबत जागरूक किया जाएगा।
इससे पहले गोला में हुआ था हादसा
जुलाई 2012 में नगर के सेंटजांस स्कूल गोला से छुट्टी के समय विद्यार्थियों को भरकर जा रही स्कूल वैन में लखीमपुर रोड स्थित नगर पालिका गेट के पास अचानक आग लग गई थी। दुकानदारों की सूझबूझ से विद्यार्थियों को तो वाहन से सुरक्षित निकाल लिया गया था लेकिन मारुति वैन पूरी तरह जल गई थी।
यह है स्कूली वाहनों का मानक
- गाड़ी का रंग पीला हो
- सीएनजी या गैस से चलाने के लिए किट एआरटीओ से स्वीकृत हो
- ड्राइवर की सीट की ओर और बाहर प्रिंसिपल और स्कूल का फोन नंबर स्पष्ट अक्षरों में अंकित हो
-वाहन के सीटों की क्षमता से डेढ़गुना से ज्यादा बच्चे वाहन में न बिठाए जाएं
-वाहन में फर्स्ट एड बाक्स उपलब्ध हो
-वाहन में अग्निशमन यंत्र लगा हो
-वाहन में एक परिचालक हो जो बच्चों को बस में चढ़ने और उतरने में मदद करे
-वाहन में दरवाजा अपने आप बंद होने वाला हो
-बच्चों को उतरने के लिए फुटस्टेप नीचे हों
- वाहन के पीछे लिखा हो कि इस बस से बच्चे चढ़ उतर रहे है इसलिए सावधानी बरतें