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डीएम बोलीं, खुली आंखों से बड़ा सपना देखें युवा

Wed, 28 Oct 2015 07:29 PM IST
लखीमपुर खीरी
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चंद दिनों पहले तक किसी थारू बालिका ने केरल के शास्त्रीय नृत्य मोहिनी अट्टम और उत्तर भारत के शास्त्रीय नृत्य कथक का शायद नाम भी नहीं सुना था, लेकिन यह बात किसी चमत्कार से कम नहीं है कि द राइजिंग अभियान के दौरान एक सप्ताह से भी कम समय में मोहिनी अट्टम और कथक जैसे शास्त्रीय नृत्य का नाम न सुनने वाली थारू लड़कियों ने परियोजना परिसर के मैदान में दुल्हन की तरह सजे पंडाल में हजारों लोगों के सामने पारंगत नृत्यांगना की भांति शास्त्रीय नृत्य पेश कर यह साबित कर दिया कि द राइजिंग अभियान अपने उद्देश्यों में पूरी तरह से सफल रहा।
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मंगलवार को देर रात हुए समापन समारोह में डीएम किंजल सिंह ने थारू युवक-युवतियों का आह्वान किया कि वे अपने लिए खुली आंखों से बड़े से बड़ा सपना देखने और उसे पूरा करने के लिए इस शिद्दत के साथ जुट जाएं कि आंखों से नींद उड़ जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है, लेकिन सफलता आपके प्रयासों पर निर्भर है। आयोजन स्थल पर हर ओर उत्सव जैसा माहौल और सभी युवक युवतियों के चेहरों पर विजेताओं जैसी मुस्कान को डीएम ने दिवाली की संज्ञा देते हुए कहा कि मेरे लिए आज ही दिवाली है। समापन समारोह में एसएसबी जवानों का आकर्षक मार्चपास्ट और डॉग स्क्वॉयड शो भी शानदार रहा। समापन समारोह में कमाल म्यूजिकल ग्रुप लखनऊ की प्रस्तुति का थारू युवक-युवतियां पूरे समय आनंद लेते रहे। वनांचल की खुली हवाओं में हाट एयर बैलून छोड़कर रंगारंग आतिशबाजी के बीच द राइजिंग कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर तहसील और जिले के सभी अधिकारी और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
थारू युवाओं की प्रतिभा देख दंग रह गए लोग
द राइजिंग अभियान का मूल उद्देश्य था कि थारू बाहुल्य क्षेत्रों में खुशहाली लाने के लिए कई रास्ते खोले जाएं और आयोजन के बहाने थारू जनजाति के लोगों विशेषकर युवक युवतियों का बाहरी दुनिया से परिचय कराया जाए और बाहरी दुनिया के लोग भी थारू जनजाति की प्रतिभा से रूबरू हो सकें। यही वजह है कि डीएम किंजल सिंह ने खेल, नृत्य, ड्रामा, ई-मार्केटिंग, कॅरियर काउंसिलिंग, योग और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को बुलाया। ये लोग भी थारू युवक युवतियों की प्रतिभा को देखकर दंग रह गए। वनांचल से आए सूरमाओं ने एक स्वर में यही कहा कि यह क्षेत्र प्रतिभाओं के मामले में हीरे की खान है। आवश्यकता है तो बस इन्हें तराशने की, जिसके लिए द राइजिंग जैसे आयोजन मील का पत्थर साबित होंगे।
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