जिला अस्पताल के निकट भी चल रहे ऐसे सेंटर
जिले में गली-गली अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं, जिसमें से अधिकतर का न तो सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण है और न ही इनके यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती ही है, जिससे यहां से दी जाने वाली रिपोर्ट कितनी सही है इस पर सवाल उठना लाजमी हैं। सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटरों की संख्या सिर्फ 54 है।
जिले में दिन प्रतिदिन पान की दुकानों की तरह अल्ट्रासाउंड सेंटर खुलते जा रहे हैं, जिससे इनका आंकड़ा सौ के पार पहुंच गया है, इनमें सर्वाधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर जिला मुख्यालय पर हैं। जिला अस्पताल के आसपास ही कई अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं, इनमें से अधिकतर अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर रेडियालॉजिस्ट भी तैनात नहीं हैं, जिससे यहां पर अप्रशिक्षित लोग ही अल्ट्रासाउंड करके मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने में लगे हैं लेकिन सेहत महकमे के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से उदासीन बने हुए हैं।
ये हैं मानक
सेहत महकमे के लोगों का कहना है कि अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने के लिए रेडियालॉजिस्ट का होना जरूरी है। रेडियोलॉजिस्ट यदि नहीं है तो एमबीबीएस डॉक्टर भी अल्ट्रासाउंड सेंटर खोल सकता है, बशर्ते उसके पास रेडियोलॉजिस्ट का डिप्लोमा हो।
जांच के लिए गठित है समिति
सीएमओ ने बताया कि अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच के लिए डीएम की अध्यक्षता में एक समिति होती है, जो शिकायत मिलने पर सेंटर की जांच करती है। उन्होंने बताया कि डीएम के निर्देश पर डॉक्टर और सिटी मजिस्ट्रेट अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच करते हैं।
करीब दो साल से नहीं हुई है जांच
सीएमओ ने बताया कि अभी हाल ही में स्थानांतरित होकर लखीमपुर आया हूूं। आखिरी बार अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच कब हुई है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। हालांकि सीएमओ ऑफिस में बैठे एसीएमओ प्रशासन डॉ.बीवी राम ने बताया कि करीब दो साल पहले अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच हुई थी।
पंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटरों की संख्या
लखीमपुर में 28, गोला में छह, पलिया में नौ, मोहम्मदी में पांच, मैलानी में दो, संपूर्णानगर में दो और भीरा में एक
जिले में अपंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटर चलने की जानकारी मिली है। जल्द ही अभियान चलाकर जांच कराई जाएगी और अपंजीकृत सेंटर संचालकों पर कार्रवाई होगी।
-डॉ.जावेद अहमद, सीएमओ