जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। इन दिनों यहां वायरल, तेज बुखार, डायरिया के मरीजों से वार्ड फुल हैं, लेकिन व्यवस्थाएं नगण्य हैं। आलम यह है कि बेड की कमी होने पर मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल के प्रवेश द्वार से ही अव्यवस्थाएं नजर आने लगती है। चाहे ओपीडी, इमरजेंसी, जनरल, सर्जिकल या चिल्ड्रेंस वार्ड हर जगह अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। स्टाफ के असहयोग का नतीजा ही है कि स्ट्रेचर होने के बाद भी गंभीर मरीजों को लादकर अथवा पैदल ले जाया जाता है। मेडिकल वार्ड में धौरहरा निवासी जोगेश्वर एनीमिक मरीज हैं, लेकिन उनका जमीन में लिटाकर इलाज किया जा रहा है। इस बाबत सीएमओ डॉ. वीके साहू कहते हैं कि तमाम व्यवस्थाएं की जाती हैं, लेकिन कुछ न कुछ कमी रह जाती है। कोशिश यही है कि सभी को सुविधाओं का लाभ मिल सके।
वीआईपी वार्ड का शौचालय चोक
जिला अस्पताल के वीआईपी वार्ड का शौचालय चोक हो गया है। हालांकि इसे चोक हुए काफी समय हो चुका है, लेकिन बृहस्पतिवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दिवंगत कुंजबिहारी लाल पुरी के पौत्र रचित पुरी ने अपनी वयोवृद्ध दादी गोमा देवी को इसमें भर्ती कराया। शौचालय चोक होने के कारण उनकी हालत और बिगड़ गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी वार्ड में भर्ती कराया गया। इस बाबत भी सीएमओ डॉ. वीके साहू कहते हैं कि वीआईपी वार्ड के शौचालय को जल्द ठीक कराया जाएगा।
खुले में तीमारदार और बरामदे में पशु
जिला अस्पताल में तीमारदारों को बैठने की सुविधा नहीं मिलती तो वह खुले मैदान में बैठ जाते हैं। आलम यह है कि देखरेख न होने के कारण पशु परिसर में टहलते रहते हैं और वह बरामदे तक में बैठ जाते हैं। इससे मरीज और उनके तीमारदारों को भी इन पशुओं से खतरा बना रहता है।