लखीमपुर खीरी। दिवाली प्रकाश और प्रसन्नता का पर्व है। मगर, वर्तमान दौर में दीपोत्सव त्योहार सिर्फ आतिशबाजी तक सिमट कर रह गया है। आज हालत यह बन गए हैं कि प्रकाश पर्व दीयों का कम पटाखा और आतिशबाजी करने का ज्यादा लगता है। जबकि इसका धुआं पर्यावरण और सेहत के लिए हानिकारक है। धुएं में तमाम हानिकारक तत्व शामिल होते हैं। इसमें कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड जैसी विषैली गैसें होती हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक रहती है। इससे आंखों में जलन, चुभन और दम घुटने जैसी स्थित पैदा होने लगती है। इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि खुशियों के पर्व पर दीपक जलाकर त्योहार मनाएं। न कि आतिशबाजी कर प्रदूषण फैलाएं।
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इस तरह रखें सावधानी
- आतिशबाजी खुले स्थान पर और सावधानी पूर्वक जलाएं।
- धातु व शीशे पर रखकर पटाखे बिल्कुल न जलाएं।
- पानी से भरी बाल्टी और बर्फ पास में रखें।
- सूती चुस्त और मोटे कपड़े पहने।
- बच्चों को दगने वाले पटाखों से दूर रखें।
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वैसे तो आतिशबाजी से दूर रहें। पटाखा जलाते समय खासतौर पर आंख का विशेष ध्यान रखें। यदि बारूद आंख में पड़ जाए न रगड़ें और न मलें। हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोकर आंख धोलें और फिर डॉक्टर को दिखाएं। आतिशबाजी करते समय उसकी रोशनी की ओर न देखें।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस एवं नेत्र सर्जन जिला अस्पताल
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पटाखों से निकला धुआं सांस रोगियों को बेहद नुकसान पहुंचाता है। इससे श्वसन मार्ग में सूजन होने से सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इससे दमा का दौरा तक पड़ सकता है। सांस रोगी घर में रहें। तरल पदार्थ का सेवन करें और बिना मास्क घर से बाहर न निकलें।
-डॉ. डीके यादव, ईएमओ जिला अस्पताल