बांकेगंज जंगल से सटे पेड़ की डाल पर बैठा उल्लू। (फाइल फोटो)
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दिवाली पर लोग जहां महालक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां करते हैं वहीं कुछ लोग उनका वाहन कहे जाने वाले उल्लू का अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के लिए शिकार करते हैं। ऐसे में दिवाली के समय खासकर धनतेरस से दिवाली तक उल्लू के शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन इसको लेकर कड़ी सतर्कता बरत रहा है, ताकि शिकार पर रोक लग सके।
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि दिवाली के दौरान उल्लुओं का शिकार रोकने के लिए पूरे टाइगर रिजर्व में वन कर्मियों की टीमें गठित की गईं है। टीमों में शामिल वन कर्मियों को जंगल से सटी आबादी वाले क्षेत्र में चौबीस घंटे बारी-बारी से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर बहेलियों और शिकारियों को चिह्नित कर उनकी निगहबानी के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया दिवाली पर कुछ लोग अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के लिए चोरी-छिपे उल्लुओं का शिकार करने की फिराक में रहते हैं। इसको लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन कड़ी सतर्कता बरत रहा है। उन्होंने बताया कि जंगल से सटी आबादी के रास्तों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उल्लू का शिकार करने वाले लोगों के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संवाद