बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) के आसपास बाघ और तेंदुओं के साथ अब मगरमच्छ भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। वर्ष 2020-21 से 11 जून 2026 तक मगरमच्छों के हमलों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 36 लोग घायल हुए हैं। इसके बावजूद जिन बफरजोन क्षेत्रों में सबसे अधिक हमले हो रहे हैं, वहां वन विभाग ने अलग से कोई मोटीवेटर तैनात नहीं किया है। इससे नदी और नालों के आसपास रहने वाले ग्रामीण दहशत में जीवन बिता रहे हैं।
बरसात में शारदा, घाघरा और सुहेली नदियों में बाढ़ आने पर बड़ी संख्या में मगरमच्छ गांवों के आसपास तालाबों, नालों और रजबहों तक पहुंच जाते हैं। डीटीआर के बफरजोन के मझगईं, निघासन, फूलबेहड़, धौरहरा और बिजुआ क्षेत्र में घास काटने, मवेशी चराने और खेतों में जाने वाले लोग इनके हमलों का शिकार हो रहे हैं। बारिश शुरू होते ही कई गांवों के आसपास मगरमच्छों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है। वन विभाग लोगों को सचेत कर रहा है, लेकिन अनजाने या लापरवाही में लोग तालाबों और नालों के पास पहुंच जाते हैं। नालों के किनारे चरने वाले पशु भी मगरमच्छों के हमलों में मारे जा रहे हैं।
वन विभाग ने बाघ, तेंदुआ और मगरमच्छ जैसे हिंसक वन्यजीवों से बचाव के लिए कोर जोन में मोटीवेटर तैनात किए हैं, जबकि हमलों का खतरा मुख्य रूप से बफरजोन में है। ग्रामीणों की मांग है कि बफरजोन में भी अलग से मोटीवेटर तैनात किए जाएं, ताकि लोगों को वन्यजीवों से बचाव के उपाय बताए जा सकें।
डीटीआर बफरजोन के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में बाघों के हमलों में 42 लोगों की मौत और 36 लोग घायल हुए। तेंदुओं के हमलों में 22 लोगों की मौत हुई और 107 लोग घायल हुए। जिले में वन्यजीवों के हमलों में कुल 75 लोगों की मौत और 172 लोग घायल हुए।
पिछले सात वर्षों में मगरमच्छों के हमले
वर्ष
मृतक
घायल
2020-21
0
3
2021-22
2
3
2022-23
0
3
2023-24
3
4
2024-25
3
8
2025-26
2
5
2026-27 (11.6.2026 तक)
3
10
-
बरसात के मौसम में मगरमच्छों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए वन विभाग की टीमें लोगों को जागरूक कर रही हैं। जिस गांव से मगरमच्छ की सक्रियता या हमले की सूचना मिलती है, वहां तत्काल टीम भेजकर मगरमच्छ का रेस्क्यू कर सुरक्षित नदी में छोड़ा जाता है।
-डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
नौसर जोगी के कुंडा तालाब में मगरमच्छ का आतंक
बिजुआ। गोला वनरेंज क्षेत्र की रामनगर बीट के नौसर जोगी गांव स्थित कुंडा तालाब में एक बड़े मगरमच्छ के दिखाई देने से ग्रामीण दहशत में हैं। आबादी के सामने स्थित इस तालाब में पिछले एक सप्ताह में मगरमच्छ दो कुत्ते, एक बकरी और आठ बत्तखों को अपना शिकार बना चुका है।
ग्रामीण अख्तर ने बताया कि तालाब किनारे जानवरों के अवशेष मिलने के बाद लोगों ने वहां जाना बंद कर दिया है। ग्रामीण शिवकुमार, गौरव, नितिन और शान मोहम्मद का कहना है कि मगरमच्छ अक्सर तालाब से निकलकर किनारे तक आ जाता है। इससे बच्चे और पशु चराने वाले लोग डर के कारण उस रास्ते से नहीं गुजरते।
गोला रेंजर अमित कुमार सिंह ने बताया कि टीम मगरमच्छ का रेस्क्यू करने का प्रयास करेगी। तब तक लोगों को बच्चों, पशुओं, बत्तखों और मुर्गियों को तालाब से दूर रखने तथा निगरानी रखने की सलाह दी गई है। संवाद
नौसरजोगी में तालाब में तैरता मगरमच्छ। ग्रामीण