लखनऊ में मुख्यमंत्री से वार्ता करते सिक्ख संगठन उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड का प्रतिनिधिमंडल
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। सिख संगठन उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला। बिजनौर, लखीमपुर, रामपुर में ग्राम समाज और वन विभाग की जमीन पर बसे सिख परिवारों को उजाड़ने से रोकने और पीलीभीत के नानकसागर डैम से विस्थापित परिवारों को पुन: बसाए जाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल संगठन के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगतार सिंह ने बताया कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान तमाम सिख परिवारों को ग्राम समाज एवं वन विभाग की खाली जमीनों पर बसाया गया था, जिससे ये लोग इन जमीनों पर खेती किसानी करके अपनी जीविका चला सके। इस तरह तमाम सिख परिवार बिजनौर की नगीना तहसील के गांव चंपतपुर, लखीमपुर की तहसील निघासन के रननगर और रामपुर की तहसील स्वार के करीब 15 गांव की जमीनों पर रहकर खेतीबाड़ी करके परिवार का पालन पोषण करते आ रहे थे। उन्होंने बताया कि रामपुर के नवाब ने पाकिस्तान से आए सिखों को बसाया था। इन जमीनों पर सरकार की ओर से सड़क, स्कूल कॉलोनिया तक बनवाई गई। इन जमीनों का वाद भी विचाराधीन है। इसके बावजूद 15 मई 2020 को सिख परिवारों को जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से उजाड़ने का प्रयास किया गया। उधर 1962 में पीलीभीत के नानकसागर डैम से विस्थापित किए गए सिख परिवारों को पुन: बसाए जाने की मांग की। जगतार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि सिख परिवारों को किसी भी विभाग द्वारा कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी। जगतार सिंह ने बताया कि किसान जिन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। उन जमीनों को किसानों के नाम दर्ज कर खतौनी उपलब्ध कराने के लिए कमेटी गठित की है, जिसका कोऑर्डिनेटर बलदेव सिंह औलख को बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष सरदार जसवीर सिंह विर्क, जगतार सिंह, पाल सिंह, जगवीर सिंह भट्टी आदि मौजूद रहे।