शस्त्र जमा करने के तीसरे दिन हाथियों की देखरेख करने वाले महावत भी हाथियों को दुधवा प्रशासन के हवाले कर हड़ताल में शामिल हो गए। इससे पूर्व उन्होंने हाथियों के साथ जुलूस निकालकर नारेबाजी की।
गौरतलब है कि दुधवा के कर्मियों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेज कर मांग की थी कि डीएम को निलंबित किया जाए और ऐसा न होने पर उन्होंने 16 फरवरी को शस्त्र और 18 फरवरी को पालतू हाथियों को जमा करने की चेतावनी दी थी। कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने 16 फरवरी को राजकीय शस्त्रों को जमा कर दिया था। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने आज 18 फरवरी को दुधवा के पालतू हाथियों की देखभाल करने से मना कर दिया। इसी दौरान किशनपुर वार्डन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के समन्वयक डॉ. मुदित गुप्ता वहां पहुंच गए और कर्मचारी नेताओं से वार्ता की। उन्होंने कर्मियों को समझाया कि वह हाथी पलिया मुख्यालय न ले जाएं। काफी देर की वार्ता के बाद कर्मियों ने हाथियों को दुधवा कैंपस में ही पार्क प्रशासन के हवाले कर दिया। इसके बाद से कर्मी अब उनकी देखरेख नहीं करेंगे। बता दें कि पार्क में करीब 13 हाथी हैं, जो पर्यटन में तो काम आते ही हैं। विभागीय कार्य भी करते हैं। खासकर पर्यटन में इन हाथियों की जरूरत सैलानियों को गैंडा परियोजना के भ्रमण कराने में आती है।
ये है मामला
फेडरेशन के अध्यक्ष पतिराज सिंह और उपाध्यक्ष राजकुमार के अनुसार, 23 नवंबर 2015 को डीएम ने पार्क उपनिदेशक पीपी सिंह से अभद्रता की। इसके बाद विगत वर्ष से मानसिक एवं बौद्धिक रूप से प्रताड़ित करने, बिना पार्क प्रशासन की अनुमति के पार्क में प्रवेश कर रात रात भर काफिले के साथ भ्रमण करने आदि के डीएम पर आरोप लगाए थे। इसको लेकर 29 नवंबर से कार्य बहिष्कार शुरू हुआ था। 30 नवंबर से एक दिसंबर तक दो दिन की हड़ताल भी हो गई थी, जिसके चलते पार्क का पर्यटन बंद रहा था। इसके बाद इन्हीं आरोपों पर कार्रवाई को लेकर 16 दिसंबर 2015 को फिर हड़ताल की गई जो दो दिन जारी रही। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और पार्क अधिकारियों की मध्यस्थता में हुई बैठक के बाद हड़ताल खत्म कर दी गई, लेकिन 27 जनवरी से कर्मचारियों ने डीएम पर किशनपुर सेंचुरी में कर्मियों के साथ अभद्रता और एआरटीओ को भेजकर जिप्सियां सीज कराने का आरोप लगाकर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। तबसे हड़ताल जारी है।
आज रवाना होंगे लखनऊ के लिए कर्मी
लखनऊ में होने वाली एक दिवसीय भूख हड़ताल के लिए सभी कर्मी 19 फरवरी को यहां से रवाना होंगे। फेडरेशन आफ फारेस्ट के अध्यक्ष पतिराज सिंह और उपाध्यक्ष रामकुमार ने बताया कि लखनऊ में वह प्रांतीय नेताओं के साथ एक दिवसीय भूख हड़ताल कर डीएम पर कार्रवाई की मांग करेंगे।
पीआरडी जवानों को भी गया हटाया
पलियाकलां। कर्मियों के शस्त्र जमा कर देने के बाद दुधवा की सुरक्षा का जिम्मा डंडाधारी पीआरडी जवानों को दिया गया था, लेकिन ये भी अब हटा लिए गए हैं। अब नेशनल पार्क पूरी तरह से लावारिस है और उसकी सुरक्षा के लिए कोई भी नहीं है। प्रदेश के इकलौते नेशनल और टाइगर रिजर्व पार्क की सुरक्षा अब राम भरोसे ही हो गई है।
कमांडर के निर्देश पर दुधवा में तैनात पीआरडी जवानों को हटा लिया गया है।
- वेदराम, ब्लाक कंपनी कमांडर पीआरडी