डिमांड के मुताबिक नहीं मिल पा रहीं स्वाइप मशीनें
नोटबंदी के बाद जिले में कैशलेस भुगतान के लिए कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन संसाधनों का टोटा आड़े आ रहा है। ई-गर्वनेंस सिस्टम को ग्रामीणों को जानकारी देने के लिए अलर्ट किया गया है। दुकानों पर स्वाइप मशीन और पेटीएम के जरिए भुगतान किया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर दुकानों पर यह व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इससे एटीएम, डेबिट कार्डधारकों को खरीदारी करने में दिक्कतें पेश आ रहीं हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की बैंक में कैश न मिलने से लोग कैशलेस के विकल्प के अभाव से ज्यादा प्रभावित हैैं।
दुकानदारों ने स्वाइप मशीन के लिए बैंकों के पास आवेदन किया है, लेकिन डिमांड के मुताबिक बैंकों के पास मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। एसबीआई मेन ब्रांच के मुख्य प्रबंधक अमरेश कुमार मौर्या ने बताया कि शहर में अब तक करीब 60 स्वाइप मशीने लगाई जा चुकी है। करीब 30 दुकानदारों के आवेदन पेंडिग पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्र में भी ब्रांचों के पास काफी आवेदन आए हैं, लेकिन स्वाइप मशीनों की आपूर्ति धीरे धीरे हो रही है। उधर, इलाहाबाद बैंक के एलडीएम एके द्विवेदी ने बताया कि मशीनें लगवाने के लिए रोज ही दुकानदार आवेदन कर रहे हैं। उपलब्धता के अनुसार दुकानों पर मशीने लगाई जा रही हैं। अब तक करीब 70 मशीनें लगाई जा चुकी हैं।