नवरात्र के लिए सज रहे देवी मंदिर
स्थापना के लिए मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में
पूजा सामग्री खरीदने को बाजार में उमड़ी भीड़
वासंतिक नवरात्र के लिए जिले भर में जोरदार तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में साफ सफाई और साज सज्जा के साथ स्थापना के लिए मूर्तियों का निर्माण अंतिम चरण में है। नवरात्र में प्रयोग होने वाली पूजन सामग्री की सोमवार को खूब बिक्री हुई। पूजा सामग्री की दुकानों पर दिन भर भीड़ भाड़ बनी रही।
संकटादेवी मंदिर में स्वयंसेवक सोमवार को दिनभर मंदिर परिसर की साफ सफाई में जुटे रहे। मंदिर का रंग रोगन कर उसे बिजली की रंग बिरंगी झालरों और फूलों की लड़ियों से सजाया जा रहा है। मंदिर में स्थापित की जाने वाली मूर्ति के निर्माण और साज सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कारीगर दिन भर मूर्ति निर्माण में जुटे रहे। संकटादेवी मंदिर में मूर्ति और कलश स्थापना 29 मार्च दिन बुधवार को विधि विधान से किया जाएगा।
संकटादेवी मंदिर के अलावा शहर के शीतला देवी मंदिर, वंकटादेवी मंदिर, भुइयां माता मंदिर के अलावा जिले भर के मंदिरों में भी साज सज्जा का काम जारी रहा। महिलाओं ने मां को अर्पित करने के लिए चुनरी, झंडे, मिट्टी का कलश, नारियल, लौंग इलायची, सुपाड़ी फल मिठाइयां और हवन सामग्री आदि की खरीदारी की।
विभिन्न पंचागों में नवरात्र शुरू होने की अलग-अलग तिथियां बताए जाने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। गोला गोकर्णनाथ के प्रसिद्ध ज्यातिषी पं. रामदेव शास्त्री के अनुसार नवरात्र का शुभारंभ 29 मार्च को होगा। अवध क्षेत्र में 29 मार्च बुधवार को सूर्यादय छह बजकर सात मिनट पर होगा। उस समय प्रतिपदा तिथि होगी। सूर्योदय के समय की तिथि को ही पूरे दिन की तिथि मानी जाती है। इसलिए नवरात्र का शुभारंभ 29 मार्च को होगा। 28 मार्च को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि है इसलिए 28 मार्च के बजाय नवरात्र 29 मार्च से शुरू होगी। 29 मार्च को देवी भक्त मां के दो स्वरूपों शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा एक साथ करेंगे। 29 मार्च को सूर्योदय के बाद केवल 25 मिनट तक प्रतिपदा रहेगी उसके बाद द्वितीया तिथि लगेगी। चूंकि सूर्योदयी तिथि प्रतिपदा है इसलिए द्वितीया तिथि की हानि मानी जाएगी। कुछ स्थानों पर 28 मार्च को नवरात्र शुरू होंगे।
नवरात्र की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पं. रामदेव शास्त्री ने बताया कि नवरात्र की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त बुधवार प्रात:काल छह बजकर 32 मिनट से पहले और इसके बाद अभिजित मुहूर्त माध्याह्न 11 बजकर 35 मिनट के बीच है। इस साल केवल आठ दिन की नवरात्र होगी। चार अप्रैल को महाष्टमी की पूजा होगी। और पांच अप्रैल बुधवार को रामनवमी के साथ ही नवरात्र का समापन होगा। विसर्जन छह अप्रैल को होगा।