- पिछले तीन माह से चार वर्षीय बच्ची कुपोषण की शिकार थी
- कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे राज्य पोषण मिशन पर उठे सवाल
- गांव की आंगनबाड़ी वर्कर, आशा भी सवालों के घेरे में
राज्य पोषण मिशन के तहत गांवों में बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए चलाई जा रही मुहिम को झटका लगा है। जिला अस्पताल के इमर्जेंसी वार्ड में कुपोषण की शिकार चार वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। बच्ची पिछले तीन माह से अतिकुपोषण का शिकार थी, लेकिन समय पर उसे इलाज नहीं मिल पाया। गांव की आंगनबाड़ी वर्कर और आशा ने भी जिला अस्पताल में अतिकुपोषित बच्चों के लिए खोले गए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नहीं कराया था। रविवार को तबियत बिगड़ने पर परिवार वाले बच्ची को लेकर जिला अस्पताल आए, जहां इलाज शुरू होने के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
बेहजम ब्लाक के गांव धुमरा निवासी राकेश कुमार गुप्ता की चार वर्षीय पुत्री जाह्नवी पिछले तीन माह से अतिकुपोषित थी, जिसका उपचार कराने के लिए राकेश कुमार रविवार को जिला अस्पताल आया था। यहां पर डॉ. राजेश कुमार ने बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार देने के बाद चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कर लिया, लेकिन बच्ची ने वार्ड में भर्ती होने के साथ ही दम तोड़ दिया। राकेश कुमार ने बताया कि बच्ची पिछले तीन माह से बीमार थी। उसका गांव में ही इलाज कराया गया था। रविवार को हालत ज्यादा खराब हुई, तो उसे लेकर जिला अस्पताल आए। यहां इमर्जेंसी में डॉ. राजेश कुमार ने बच्ची को देखकर अतिकुपोषण से पीड़ित होना बीमारी का कारण बताया। कमजोरी के चलते बच्ची को निमोनिया भी हो गया था।
नियम दरकिनार
जानकारी होने पर भी नहीं चेती आंगनबाड़ी वर्कर और आशा
लखीमपुर खीरी। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए डीएम-सीडीओ समेत सभी जिलास्तरीय अफसरों ने दो-दो गांव गोद ले रखे हैैं। तो सभी गांवों में आंगनबाड़ी वर्कर और आशा को प्रत्येक घर के बच्चे का वजन कर कुपोषित और अतिकुपोषित होने का चिन्हीकरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई हैै। वह घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं के साथ कुपोषण से पीड़ित बच्चों का पंजीकरण करें और इसकी सूचना एमओआईसी और सीडीपीओ के माध्यम से जिला कार्यक्रम अधिकारी और सीएमओ के भेजे जाने के निर्देश हैं। अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में खोले गए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के निर्देश हैं, जहां इलाज के साथ ही बच्चे की मां को आर्थिक मदद भी जाती है। इसे विडंबना कहें या तंत्र की विफलता कि पिछले तीन माह से अतिकुपोषण की शिकार इस बच्ची का आंगनबाड़ी वर्कर और आशा ने चिन्हीकरण ही नहीं किया था। धुमरा गांव की आंगनबाड़ी वर्कर पूनम ने बताया कि इस बात की जानकारी थी कि बच्ची कुपोषण का शिकार है, लेकिन उसका चिन्हीकरण न होने के कारण इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी जा सकी।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती हैं 11 अतिकुपोषित बच्चे
जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में अतिकुपोषित 11 बच्चे भर्ती हैं। इसमें दो वर्षीय पुत्री रिया पुत्री मोहित मिश्रा, 15 माह का कृष्णा पुत्र उमेश, दो वर्षीय मोहित पुत्र प्रमोद, दो वर्षीय अंजली पुत्री लक्ष्मन, 10 माह का आर्यन पुत्र रामसरन, ढाई वर्षीय संदीप पुत्र रामसहाय, दो वर्षीय अनुज पुत्र रामनरेश, एक वर्षीय सुनील पुत्र बृजेश, एक वर्षीय सचिन पुत्र राजेंद्र, सात माह का नितिन पुत्र देवनरायन और तीन वर्षीय नीलू पुत्र अभिषेक भर्ती है। पोषण पुनर्वास केंद्र की आहार विशेषज्ञ दिव्या चतुर्वेदी ने बताया कि वार्ड में 10 बेड की क्षमता हैै।
यह बच्ची एक-डेढ़ महीने पहले ही गांव में आई थी। बच्ची कुपोषित थी, इसकी जानकारी मिली थी, लेकिन अभी चिन्हीकरण नहीं हो सका था।
- पूनम, आंगनबाड़ी वर्कर, धुमरा बड़ेरा
बच्ची को रविवार की दोपहर में जिला अस्पताल के इमर्जेंसी में लाया गया था, लेकिन बच्ची की हालत अधिक नाजुक थी। गंभीर हालत देखते हुए उसे तुरंत भर्ती करवाया था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। कुपोषण के अलावा बच्ची में निमोनिया के भी लक्षण थे।
- डॉ.राजेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ