- 14 करोड़ की लागत से हुआ है निर्माण
- विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन
- शुरूआत से उठ रही थी निर्माण पर उंगली
करीब 14 करोड़ की लागत से कई थारू गांवों को मोहाना नदी के कटान से बचाने को बनाए गए तटबंध के स्पर नदी के बहाव में क्षतिग्रस्त हो गए। जिसको लेकर थारूओं में गुस्सा है और उन्होंने सिंचाई महकमे के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की।
बता दें कि अर्से से नेपाली मोहाना नदी थारू गांव ढाकिया, नझोटा, सौनहा, बंदरभरारी आदि दर्जनों गांवों की जमीनों को कटान कर अपने आगोश में समा रही है। इन गांवों का वजूद इससे खतरे में पड़ गया था। वर्ष 2015 में शासन ने पूर्व पीसीसी सदस्य रिसाल अहमद के पत्र पर ढकिया, नझौटा के बीच 796.37 लाख, सौनहा और बंदरभरारी के बीच 633.92 लाख रुपये की कटान रोधी परियोजना को मंजूरी दे दी और उनको पत्र देकर वाकिफ भी किया। मंजूरी के बाद सिंचाई महकमें ने कार्य शुरू भी करा दिया लेकिन ठोकरों के निर्माण में मानक विहीन कार्य के आरोप शुरूआत से ही लगने लगे। यहां जीओ और ईसी बैग से ठोकरों के निर्माण किया जा रहा था जो बीच में ही नदी में पानी बढ़ने से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसको लेकर ग्रामीणों में काफी गुस्सा था और उन्होंने शिकायतें डीएम, सिंचाई सचिव व मुख्यमंत्री को भी भेजीं लेकर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को यहां तमाम थारू पहुंचे और क्षतिग्रस्त स्परों को लेकर सिंचाई महकमें के खिलाफ प्रदर्शन किया और जांच कर दोषियों को सजा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कमेटी सदस्य रिसाल अहमद भी पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर जल्द कार्रवाई कराने की बात कही। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वह अभी शासन से मांग कर रहे हैं कि कार्य की जांच की जाए यदि जांच नहीं होती है तो वह कोर्ट में मामला ले जाएंगे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करेंगे।