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साइबर क्राइम: चार साल में 210 मामले दर्ज, खुलासा एक का नहीं

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cyber crime
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लखीमपुर खीरी। इंटरनेट का असुरक्षित तरीके से उपयोग करने के कारण ही लोग साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं। साइबर सेल और पुलिस के पास सर्वाधिक शिकायतें बैंक से संबंधित ऑनलाइन ठगी की आती हैं, जिनमें यह बात सामने आई है कि लोग अपनी छोटी से लापरवाही के कारण ही लाखों रुपये गंवा देते हैं।
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डिजिटल इंडिया के इस दौर में अपराधी भी डिजिटल हो गए हैं। आमलोगों में तकनीकी दांवपेंच की कम समझ ने इन अपराधियों के लिए ठगी के खेल को और भी आसान बना दिया है। साइबर ठगी के मामले बढ़ गए हैं। साइबर सेल के जानकारों का कहना है कि मोबाइल एप से लेकर सोशल मीडिया, लॉटरी, ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग, एटीएम तक ठगों ने अपना जाल बिछा रखा है। वर्ष 2017 से लेकर अब तक जिले में 210 मामले दर्ज हुए। इनमें अधिकतर मामले बैंक से संबंधित हैं। इन मामलों में जालसाज ने मोबाइल पर कॉल कर एटीएम नंबर और पासवर्ड पूछकर खाते से या तो रुपये ट्रांसफर कर लिए या फिर ऑनलाइन खरीदारी कर ली। कुछ मामले तो ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें न तो किसी की कोई कॉल आई, खाता धारक ने न ओटीपी बताई न पासवर्ड और खाते से रुपये निकल गए। यह तो महज वे मामले हैं, जिन्हें पुलिस ने दर्ज किया। तमाम मामले ऐसे हैं जिनकी पुलिस ने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की। जो मामले साइबर सेल में दर्ज भी हुए उनका अब तक खुलासा नहीं हो सका।
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केस: एक
हैकर ने खाते से उड़ाए 75 हजार रुपये, रिपोर्ट दर्ज
शहर के मोहल्ला राजगढ़ निवासी उत्कर्ष वर्मा का खाता भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में है। एलआईसी पॉलिसी की किस्त फोन पे के माध्यम से देना चाहते थे। जब उन्होंने किस्त भुगतान करने की कोशिश की तो भुगतान नहीं हो सका। 21 अक्तूबर की रात 10: 01 मिनट पर मोबाइल पर मेसेज आया। मेसेज देखा तो पता चला कि खाते से 75 हजार रुपये निकल गए हैं।
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केस: दो
ओटीपी पूछकर निकाले 23 हजार रुपये
22 जून 20 को कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र के गांव तारन निवासी उमेश के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉलर ने झांसे में लेकर उसके मोबाइल पर आया ओटीपी नंबर पूछ लिया और खाते से 23 हजार रुपये निकाल लिए। मोबाइल पर जब मेसेज से रुपये निकाले जाने की जानकारी हुई।
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वर्जन...
ऑनलाइन ठगी को थोड़ी सतर्कता से बचा जा सकता है। सभी से अपील है कि किसी से एटीएम नंबर, पासवर्ड, ओटीपी और अपनी निजी जानकारी कतई शेयर न करें। यदि कोई समस्या आती है तो सीधे बैंक या पुलिस के पास जाएं और अपनी दिक्कत बताएं। साइबर सेल के पास दर्ज मामलों में खुलासे को टीमें लगी हैं।
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-विजय ढुल, एसपी
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