लखीमपुर खीरी। भीषण सर्दी के दौरान धार्मिक आयोजनों का दौर भी शुरू हो रहा है। इसको लेकर लोगों में गजब का उत्साह है। सोमवार को सकट चतुर्थी का व्रत होने के साथ सिख समाज का लोहड़ी पर्व है। व्रत और लोहड़ी पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मकर संक्रांति से सूर्य की गति बदलने से खिचड़ी के अगले दिन से ही सहालग का दौर शुरू हो जाएगा। आचार्य प्रमोद दीक्षित का कहना है कि सकट चतुर्थी का व्रत माताएं संतान की मंगलकामना के लिए रखती हैं। तो वहीं लोहड़ी और मकर संक्रांति दान का पर्व है। मकर संक्रांति पर स्नानादि से निवृत्त होकर कन्याओं को खिचड़ी दान करना बेहद मंगलकारी रहता है।
संतान के लिए माताएं रखेगीं व्रत
सकट चतुर्थी का व्रत सोमवार को है। माताएं माघ माह की कृष्ण पक्ष चौथ को संतान के लिए सकट चतुर्थी का निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन माताएं भगवान गणेश का पूजन करती हैं, क्योंकि इसदिन ही इनका जन्म हुआ था। कहीं कहीं इसे तिलकुटी और वक्रतुंड जयंती कहा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रात 08.14 पर चंद्रोदय होगा। इसके बाद पूजन कर व्रत परायण होगा।
सोमवार को लोहड़ी पर्व
सोमवार को लोहड़ी पर्व भी मनाया जाएगा। इसको लेकर गुरुद्वारों में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। सिख समाज के लोग गुरुद्वारे सहित विभिन्न जगहों पर लोहड़ी मनाएंगे। इस दिन सिख समुदाय के लोग लोहड़ी जलाएंगे। उसमें तिल, रेवड़ी, गजक, मिठाइयों की आहुति डाली जाएगी।
16 जनवरी से शदियों का लग्न
देवकली तिथि के आचार्य प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी यानी बुधवार को होगा। इस दिन प्रात: 07.54 पर सूर्य भगवान अपने पुत्र शनिदेव के घर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति का पुण्यकाल करीब 16 घंटे का रहेगा। इसदिन से खरमास समाप्त होगा। 16 जनवरी से 13 मार्च तक सहालग का दौर चलेगा।