गोला गोकर्णनाथ। सावन की सोमवती अमावस्या पर पौराणिक शिव मंदिर, गोकर्णतीर्थ परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। श्रद्धालुओं ने भोले बाबा के द्वार पर मत्था टेककर पूजा-अर्चना की, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में शिव भक्तों ने शिवालयों में शिव की आराधना की।
20 वर्षों बाद अद्भुत संयोग बना कि सावन में सोमवती अमावस्या पड़ी किंतु कोरोना संक्रमण के चलते शिव भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन नहीं कर सके। पौराणिक शिव मंदिर के कपाट बंद होने के कारण आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भक्त मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर मत्था टेककर भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना, आराधना करते दिखे। प्रमुख मंदिरों के बंद होने के कारण नगर और क्षेत्र के आसपास के शिवालयों में शिव भक्तों ने शिव का अभिषेक, पूजा की।
रोशननगर। सोमवती अमावस्या पर उपवास रख कर महिलाओं ने बरम बाबा स्थान पर पीपल के पेड़ में धागा लपेट कर परिक्रमा कर पूजा अर्चना की, जिसमें महिलाओं ने सामाजिक दूरी का पालन भी किया। रोशननगर, रामपुर डाटपुर, अम्बरपुर, अहमदनगर आदि स्थानों पर पूजा अर्चना की गई।
सोमवती अमावस्या पर महिलाओं ने किया पीपल का पूजन
लखीमपुर खीरी। सोमवार को जिले भर में सोमवती अमावस्या मनाई गई। सुहागिन महिलाओं ने पीपल वृक्ष का विधि विधान से पूजन कर पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए मन्नत मांगी। सावन का सोमवार और सोमवती अमावस्या को लेकर सुबह से ही घरों में पूजन की तैयारियां शुरू हो गईं। प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद होने के कारण श्रद्धालुओं ने मोहल्लों के शिवालयों में जलाभिषेक किया तो महिलाओं ने विधि विधान से पीपल वृक्ष किया।
धौरहरा/ईसानगर। सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा पूर्वक व्रत रखकर पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमाकर पति के दीर्घायु के लिए धागा लपेटा। इसके बाद महिलाओं ने सोमवती अमावस्या व्रत की कथा सुनकर वस्त्र, श्रंगार सामग्री, फल, मिष्टान का दान किया। पंडित विजय कुमार झा ने बताया कि सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए पीपल वृक्ष के मूल को विष्णु का प्रतीक मानकर परिक्रमा करती हैं। शास्त्रों के अनुसार पीपल में समस्त देवताओं का वास है। मूल में विष्णु, तने में शिव और अग्र भाग में ब्रह्मा विराजते हैं। इस दिन पीपल वृक्ष का सिर्फ नमन करने से एक हजार गायों के दान का फल मिलता है। कफारा के श्री लीलानाथ मंदिर, नारायणेश्वर मंदिर, नागेश्वर नाथ मंदिर में शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया।