लखीमपुर खीरी। भले ही अपनों का साथ न हो, लेकिन जेल के साथियों के साथ सजा काट रहे बंदी और कैदी इस बार होली के रंग में सरोबार नजर आएंगे। साथ ही ढोलक की थाप और मजीरे की ताल पर फाल्गुनी गीत गाकर जेल के माहौल को रंगीन बनाएंगे। बंदी और कैदियों ने जेल प्रशासन की अनुमति से इसकी तैयारी भी शुरू कर दी हैं।
होली, दीपावली हो चाहे ईद। सभी त्योहारों पर जेल प्रशासन बंदियों और कैदियों को त्योहार मनाने के लिए आजादी देता है। साथ ही त्योहार के दिन उनके खाने-पीने की भी विशेष व्यवस्था करता है। होली का त्योहार आते ही जेल में इस बार भी उमंग का माहौल है। होली में अभी छह दिन बाकी हैं, लेकिन त्योहार को लेकर बंदियों में खासा उत्साह है। बंदी और कैदी जेल में ढोलक की थाप और मजीरे की तान पर होली गीतों की तैयारी कर रहे हैं। इससे फाल्गुनी गीतों की बयार जेल में बहने लगी है।
मिष्ठान व रंग न ले जाएं
यदि आपका कोई मित्र, पारिवार का सदस्य जेल में बंद है। आप त्योहार को लेकर उससे मिलाई करने जा रहे हैं तो मिष्ठान और रंग लेकर न जाएं। बंदियों की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन ने खुला मिष्ठान व रंग अंदर ले जाने पर रोक लगा दी है।
प्रमुख त्योहार होने के कारण कुछ छूट दी गई है। बंदी होली गीतों की तैयारी कर रहे हैं। सभी बंदी और कैदी आपस में गुलाल लगाकर होली खेलेंगे। रंग का प्रयोग नहीं किया जाएगा। बंदी से मिलने वाले लोग मिष्ठान व रंग अंदर नहीं ले जा सकेंगे।
-आरबी पटेल, जेल अधीक्षक