लखीमपुर खीरी। बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी मेज नहीं हैं। पसगवां और लखीमपुर ब्लॉक के बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। आपूर्ति देने वाली फर्म विभाग से बजट न मिलने की बात कह रही है।
परिषदीय स्कूलों की दशा और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है, हालात अभी पूरी तरह सुधरे नहीं हैं। स्कूल में बच्चों के बैठने के न तो पुख्ता इंतजाम हैं और न ही अन्य जरूरी संसाधन। कुछ साल पहले शाहजहांपुर की एक फर्म को विभाग की ओर से कुर्सी मेज आपूर्ति का टेंडर मिला था।
आपूर्ति शुरू हुई तो तमाम तरह की शिकायतें हुईं। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 15 ब्लॉकों के करीब साढ़े आठ सौ स्कूलों में कुर्सी मेज की आपूर्ति की जानी थी। फर्म ने कुर्सी मेज का जो सैंपल दिखाया था, आपूर्ति के समय गुणवत्ता में अंतर पाया गया था।
खराब गुणवत्ता वाली कुर्सी मेज फर्म को वापस भेजी गईं। बताया जा रहा है कि 15 ब्लॉकों में से 13 ब्लाकों के स्कूलों को आपूर्ति पूरी भेज दी गई है। जहां पर बच्चे कुर्सी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। पसगवां के 97 और लखीमपुर ब्लाक के करीब 20 स्कूलों में अभी आपूर्ति नहीं की गई है। यहां के बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
नगर के स्कूल भी संसाधन विहीन, एक भी शिक्षक नहीं
शहर में एकाध ऐसे स्कूल हैं, जो आज भी संसाधन विहीन हैं। बच्चों के बैठने से लेकर अन्य जरूरी इंतजाम तक नहीं हैं। मोहल्ला नौरंगाबाद स्थित प्राथमिक स्कूल में 150 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इंतजाम न होने, शिक्षकों की तैनाती न होने से बच्चों की संख्या न के बराबर रहती है। बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई तो पता चला कि बच्चे जमीन में बैठे खुद से ही पढ़ाई कर रहे थे। यहां पर एक भी शिक्षक की तैनाती नहीं हैं। हाल ही में एक कर्मचारी को बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया है।
शासन स्तर से ही ग्रांट नहीं मिली है। इसी के चलते आपूर्ति नहीं हो सकी है। ग्रांट आते ही संबंधित फर्म को भुगतान किया जाएगा। नई सूची प्रोजेक्ट स्वीकृति बोर्ड से मांगे जाने पर भेजी जाएगी।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए