लखीमपुर खीरी। जिले के अधिकांश स्थानीय मार्गों पर रोडवेज बसें नहीं होने से प्राइवेट वाहन संचालकों ने खूब चांदी काटी। दिवाली के बाद भाईदूज पर उन्होंने वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर मोटी कमाई की। भीड़ अधिक होने पर लोगों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। इससे वे परेशान नजर आए।
लखीमपुर से लखनऊ, सीतापुर, गोला, मोहम्मदी, धौरहरा के लिए तो रोडवेज बसें हैं। मैगलगंज, निघासन, पलिया, फूलबेहड़ सहित कई ऐसे मार्ग है, जहां एक भी रोडवेज नहीं जाती। यह मार्ग प्राइवेट बसों के सहारे है। भाईदूज पर बृहस्पतिवार को काफी बहनें अपने भाई के घर तो काफी भाई अपने बहन के घर पहुंचे।
स्थानीय मार्ग पर रोडवेज सेवा न होने से प्राइवेट से जाना पड़ा। प्राइवेट में खासा भीड़ होने से लोगों को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। इससे यात्री काफी परेशान नजर आए, खासकर महिला व बच्चे। सबसे ज्यादा परेशानी फूलबेहड़ मार्ग के यात्रियों को उठानी पड़ी। इस मार्ग पर सरकारी तो छोड़ो प्राइवेट बसें भी नहीं चलती हैं। यहां पर सिर्फ मैजिक वाहन का संचालन होता है, जो क्षमता से अधिक सवारियां लेकर फर्राटा भरते हैं। कभी-कभी तो सवारियों को लटककर सफर करना होता है।
मैगलगंज में नहीं रुकी एक भी स्लीपर बसः मैगलगंज। कस्बे में बुधवार तड़के बस में आग की घटना के बाद बृहस्पतिवार को लंबी दूरी बसें नहीं रुकीं, जबकि आम दिनों में बसें मुख्य चौराहे पर सवारियां उतारती व चढ़ाती हैं। इस वजह से जाम की स्थिति बन जाती है, लेकिन बृहस्पतिवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। हादसे के बाद कार्रवाई के डर से बस ऑपरेटरों ने मैगलगंज में फिलहाल ठहराव बंद कर दिया। इधर, मैगलगंज में घटना के बाद मैगलगंज के अलावा निघासन, पलिया, धौरहरा आदि जगहों से लंबे दूरी की जाने वाली स्लीपर बसों मानक में सवारियां नजर आई। अग्निशमन यंत्र भी मिले। एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय ने बताया कि लगातार सवारी वाहनों की निगरानी की जा रही है। अवैध तरीके से संचालित होने वाले वाहनों पर कार्रवाई भी की जाती है।
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़। संवाद
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़। संवाद