धौरहरा। शारदा और घाघरा नदी में उफान से तहसील के 35 गांवों में पानी भर गया है। इससे करीब 40 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से करीब एक हजार हेक्टेयर में खड़ी धान, गन्ना, मक्का, उड़द, मूंगफली और केले की फसलें गलने लगी हैं। कई घरों में रखा अनाज भी पानी की चपेट में आकर सड़ गया है।
हटवा, भुरजनिया, कैरातीपुरवा, चपकहा, सधुआपुर और मिलिक गौड़ी समेत कई गांवों में पानी भरा है। चकदहा निवासी गया प्रसाद, रामप्रसाद और विश्राम तथा सधुआपुर निवासी राजेंद्र सिंह, मूलचंद और रामसिंह आदि ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित होने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी राहत नहीं मिली है। ग्रामीणों के मुताबिक, कटौली बाढ़ राहत केंद्र पर कुछ पीड़ितों को 10 दिन पहले राहत किट दी गई थी। इसके बाद अन्य प्रभावित परिवारों की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं गया।
फसलें बर्बाद होने से हजारों परिवारों के सामने भोजन और पशुओं के चारे का संकट है। ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने और फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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बाढ़ प्रभावित 2600 परिवारों को राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। राहत सामग्री उपलब्ध होने पर शेष प्रभावित परिवारों को भी राहत किट दी जाएगी। फसलों के नुकसान का राजस्व टीम सर्वे कर रही है। सभी को मुआवजा मिलेगा।
-राशी कृष्णा, एसडीएम धौरहरा
-धौरहरा-ईसानगर ब्लॉक में बाढ़ से सर्वाधिक नुकसान हुआ है। करीब एक हजार हेक्टेयर में लगी फसलें बरबाद हुई हैं, लेकिन प्रशासन चंद लोगों को विधायक के हाथों राहत किट बंटवाकर फोटो सेशन तक सीमित रहा। बाढ़ पीड़ित परेशान हैं।
-शमशेर बहादुर उर्फ शेरू भैया, पूर्व विधायक धौरहरा
बाढ़ पीड़ितों तक मैं स्वयं जाकर उनका हालचाल ले रहा हूं। बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। मैंने एसडीएम से सभी किसानों की जमीनों का सर्वे करवाकर मुआवजा दिलाने को कहा है। राहत किट भी दिलाएंगे।
-विनोदशंकर अवस्थी, विधायक