फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्राणि उद्यान के अधिकारियों ने बाघ का नाम रखा छेदीलाल

Tue, 06 Sep 2016 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
विज्ञापन
tiger - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
चिड़ियाघर में बाघ ने तोड़ा अपना अनशन, खाने लगा मांस 
विज्ञापन

नवाब बाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ में आजन्म कारावास की सजा काट रहे छेदीपुर के खूनी बाघ का नामकरण हो गया है। प्राणि उद्यान के अधिकारियों ने उसका नाम छेदीलाल रखा है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के छेदीपुर गांव से पकड़े जाने के कारण उसको यह नाम दिया गया है। छेदीपुर में ही उसने चार ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें मार डाला था। 
उद्यान के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि छेदीपुर से ट्रेंक्विलाइज कर पकड़े गए बाघ को अपनी पहचान देने के लिए छेदीपुर गांव के नाम पर ही उसका नाम छेदीलाल रखा गया है। इससे पहले खीरी जिले के किशनपुर एरिया से पकड़े गए बाघ का नाम किशन रखा गया था। छेदी लाल को प्राणि उद्यान के अस्पताल में डॉक्टरों की टीम की निगरानी में रखा गया है। साथ ही बाघ की गतिविधियों पर दिन रात नजर रखी जा रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने फोन पर बताया कि बाघ ने पकड़े जाने के करीब पांच दिन बाद खाना पीना तो शुरू कर दिया, लेकिन अभी वह अपने को सहज नहीं कर पाया है। उसे प्रतिदिन सात-आठ किलो बकरे का गोश्त दिया जा रहा है। पकड़े जाने के चार दिन बाद तक उसने कुछ भी नहीं खाया था। पिंजरे में कैद यह बाघ आसपास के माहौल को हैरत से देख रहा है। डॉ. उत्कर्ष शुक्ला का कहना है कि बाघ को चिड़ियाघर के माहौल में ढलने में अभी पांच छह महीने लग जाएंगे। तभी इसे आम लोगों के दीदार के लिए नए घर में रखा जाएगा। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें