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रूपनपुरवा गांव में चौबीस घंटे में डायरिया से दो मासूमों की मौत

Tue, 26 Jul 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बिजुआ।
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diaria - फोटो : amar ujala
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मासूमों की मौत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जागा महकमा
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सीएचसी पर दोपहर तक मौत की वजह तलाशने में लगे रहे जिम्मेदार
मृतक बच्चे के छोटे भाई को भी डायरिया के बाद कराया गया भर्ती
प्रदेश सरकार एक ओर दस्त नियंत्रण पखवाड़े के तहत गांव-गांव मासूम बच्चों को ओआरएस और जिंक की दवाएं बांटने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक गांव में 24 घंटे के भीतर दो बच्चों की मौत हो गई और स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी तक न हो सकी। घर वालों की माने तो उनके बच्चों को तेज बुखार आया, फिर दस्त शुरू हुए, इसके चलते उनकी मौत हो गई। इन मौतों की जानकारी विभाग को सोशल मीडिया से मिली। इसके बाद आननफानन में गांव में कैंप लगा कर दवाएं बांटी गईं, एक मृतक के छोटे भाई को डायरिया और बुखार के चलते सीएचसी पर भर्ती किया गया है।
बगियाखेड़ा ग्रामपंचायत का मजरा रूपनपुरवा में सोमवार को रामसागर के चार साल के पुत्र अनुराग की तेज बुखार और दस्त के कारण मौत हो गई। रात को अनुराग को दफनाया गया। सोमवार रात को रामसागर के घर से कुछ दूरी पर रहने वाले कनौजिया की तीन साल की पुत्री पूजा की भी मौत हो गई। घर वालों के मुताबिक पूजा को भी बुखार और दस्त आ रहे थे। 24 घंटे के भीतर दो बच्चों की मौत होने से गांव के लोगों में खौफ फैल गया। मंगलवार की सुबह संक्रमण के चलते दो बच्चों की मौत की सूचना सोशल मीडिया पर वायरल होने से सेहत महकमे के लोग सक्रिय हुए। दोपहर बाद गांव में बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना की टीम को भेजकर लोगों की सेहत की जांच कराई गई। सौ से अधिक बीमार लोगों का इलाज किया गया। ग्रामीणों को मुताबिक गांव में फैली गंदगी से संक्रमण हुआ है। गांव के काफी संख्या में लोग, जिनमें खासकर छोटे बच्चे हैं, तेज बुखार से पीड़ित हैं। 
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ये बच्चे हैं संक्रमण से पीड़ित
वंदना पुत्री मंजनू, बबली पुत्री द्वारिका, सावन पुत्र रामसागर और गगन समेत करीब दर्जन भर बच्चे

विभाग नही मान रहा संक्रमण से मौत
बिजुुआ। गांव से एक एक कर दो बच्चों की अर्थी उठ गई लेकिन विभाग इसे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मान रहा है। दोपहर तक सीएचसी पर जिम्मेदार इसी बात पर मंथन करते रहे कि इन बच्चों की मौत की 'और' क्या वजह रही होगी। क्षेत्र की एएनमए के मुताबिक एक बच्चे का लीवर खराब था जबकि दूसरे बच्चे को गिरने से चोटें आईं थीं। वहीं रामसागर के पिता भगतराम का कहना है कि उनके बच्चे को कभी बुखार से ज्यादा कुछ नही हुआ। इधर मृतक अनुराग के भाई सावन को डायरिया एवं बुखार के चलते सीएचसी में भर्ती किया गया है।

गांव में फैली है गंदगी
गांव के जागरूक युवा सेवा सिंह ने 17 जुलाई को विशेष तौर पर गांव में प्रधान एवं ग्रामीणों को एकत्र कर एक बैठक की थी। जिसमें गांव में फैली गंदगी एवं अवैध रूप से सड़क किनारे पड़े कूड़े के ढेरों को हटाने के लिए मनुहार की थी। इसके बाद विभागों को एक आवेदन भी दिया था लेकिन गांव में कोई काम नही हुुआ।

मासूमों की मौत की वजह एवं सूचना देना आशा वर्कर का है काम
इलाके में किसी भी मासूम की मौत होने पर खासकर डायरिया से मौत होने पर उसकी सूचना एएनएम के जरिए सीएचसी को दी जानी होती है। डायरिया से पीड़ित बच्चों का अलग रिकार्ड बनाकर सीएचसी पर रिपोर्ट करने पर आशा वर्कर को प्रोत्साहन भत्ता भी मिलता है। लेकिन यहां पर डायरिया की रिपोर्ट पिछले हफ्ते एएनएम केंद्र से मिली है, जिसमें बताया गया है कि इस गांव एक भी बच्चा बीमार नही है।
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गांव में मेडिकल कैंप लगाकर दवाएं बांटी गईं हैं, मृतक बच्चे के परिवार वाले उन्हें सीएचसी तक नही लाए थे, वहीं उनकी मौत की दूसरी वजह है, संक्रमण नही है। 
- डॉ. प्रवीन निगम, प्रभारी चिकित्साधिकारी 
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