फायरिंग कर जानलेवा हमला करने के मामले में एडीजे एमजी मदार ने तीन
हमलावरों को दोषी पाया है। तीनों हमलावरों को सात-सात साल के कठोर कारावास
की सजा सुनाई है, साथ ही 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन
पक्ष रखते हुए साशकीय अधिवक्ता कफील अहमद अंसारी ने बताया कि कस्बा धौरहरा
के वारिदटोला निवासी मथुरा प्रसाद से कई लोगों की कस्बे में ही दुश्मनी चल
रही थी। इसी बीच 17 जून 2013 की रात आठ बजे कस्बे के ही छोटकन्ने, टुन्नू
उर्फ जमुना प्रसाद तिवारी, साबिर, जैबर व जेंटर उर्फ दिनेश चंद्र ने उसके
घर पहुंचकर धावा बोल दिया। उसे बंधक बनाकर मोटर साइकिल से जबरिया खींच लाने
लगे विरोध करने पर उसे तमंचे से गोली मार दी गई। इलाज के बाद डॉक्टर्स ने
मथुरा की जान बचाई, उसकी पत्नी छबिला देवी ने पांचों हमलावरों के खिलाफ
रिपोर्ट दर्ज कराई। कोर्ट में सुनवाई के दौरान मथुरा प्रसाद ने अपनी मुख्य
परीक्षा में पांच हमलावरों के नाम बताए बाद में जिरह के दौरान उसने सिर्फ
छोटकन्ने, टुन्नू और साबिर का नाम ही लिया, कुछ इसी तरह उसकी पत्नी छबीला
देवी, व माता फुलवासा ने भी सिर्फ तीन लोगाें को पहचानने की बात बताई,
सुनवाई के बाद कोर्ट ने छोटकन्ने, टुन्नू उर्फ जमुना प्रसाद तिवारी और
साबिर को जानलेवा हमले में दोषी होने का फैसला सुनाया है। जबकि जैबर और
जेंटर को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है। दोषी हमलावरों को सात साल
के कठोर कारावास और 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है, कोर्ट
वसूली गई जुर्माने की रकम में से चोटहिल मथुरा प्रसाद को बतौर मुआवजा 15
हजार रुपये की रकम देने के लिए आदेशित किया है।