अपने पिता की इकलौती थी सुधा
बेटी की नहीं की परवाह, इकलौते बेटे के साथ मौत को लगाया गले
सुधा के जेहन में कोई ऐसी बात बैठ गई, जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर सकी। शायद इसी वजह से उसने कुल का चिराग बुझाने के साथ अपनी भी जान देने की ठान ली और सात साल की बेटी को घर अकेला छोड़ दिया। दो साल के जिगर के टुकड़े को लेकर घर की दहलीज से निकली सुधा ने शारदा नहर में छलांग लगाकर अपनी जान तो दे ही दी, साथ ही कुल का दीपक भी हमेशा के लिए बुझा दिया।
सिंगाही थाना क्षेत्र के गांव निबौरिया निवासी रमाकांत वर्मा ने बताया कि उनके दामाद जसवंत वर्मा का चाल-चलन ठीक नहीं था। उसकी बेटी आखिर कब तक पति की प्रताड़ना सहती। बात बात पर उसे मार कर पति घर से भगाता था। बोले, सुधा मेरी इकलौती पुत्री थी। बचपन बडे़ लाड़ प्यार से बिताया। 2012 में बेटी की धूमधाम से शादी की। पहली संतान बेटी को बेटी हुई, जिसका नाम माही है। वह सात बरस की है। उसके बाद उसे कहीं दहेज तो कहीं अन्य किसी बात को लेकर ताने मिलने लगे। बात-बात में पति जसवंत पुत्री को मारता-पीटता। घर से निकालता। बेटी जब फोन पर बताती तो उसे समझा बुझाकर शांत कर देते। शनिवार को भी पति ने बेटी को खूब पीटा था। घर के बाहर निकाल दिया। जब बेटी ने फोन पर बताया तो उसे रविवार को घर लाने की बात कहकर शांत कराया। सुबह होते ही वह घर से अपने जिगर के टुकड़े इकलौते पुत्र आकाश को लेकर निकली और जान दे दी।
मलाल है कि मां बेटे को बचा नहीं सके
लौखनियां पुल के निकट झोपड़ी डाल कर रह रहे साधू राजाराम और लौखनियां निवासी संतोष कहते हैं कि हमें मलाल है कि हम प्रयास करने के बाद भी मां-बेटे को बचा नहीं पाये। लाख प्रयास करने के बाद भी शव ही हाथ लगे। जिसका हम लोगों को जिंदगी भर मलाल रहेगा ।