कुछ हिस्सा खाकर अवशेष छोड़ गया बाघ, राइनो प्रोजेक्ट के लिए माना जा रहा ये बड़ा झटका
दुधवा नेशनल पार्क के राइनो प्रोजेक्ट एरिया में एक बाघ ने हमला कर सहदेव नाम के गैंडे को मार डाला और इसके बाद उसके शरीर का कुछ हिस्सा खा लिया। इसके बाद वह अवशेष छोड़ कर चला गया। रूटीन गश्त के दौरान पार्क कर्मियों को इसकी जानकारी हुई। गैंडे का शव पोस्टमार्टम कर दफना दिया गया है। इसे राइनो प्रोजेक्ट के लिए झटका माना जा रहा है।
शुक्रवार दिन में 11 बजे दुधवा नेशनल पार्क के राइनो एरिया सोनारीपुर रेंज के ककराहा ताल बीट संख्या पांच में पार्क का गश्ती दल रूटीन गश्त पर था कि उसकी नजर एक गैंडे के शव पर गई तो उसने तत्काल इसकी सूचना रेंजर को दी। रेंजर मौके पर पहुंचे और जांच कर डीडी महावीर कौजलगि को जानकारी दी। वह भी अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। गैंडे की पहचान 20 वर्षीय सहदेव गैंडे के रूप में की गई। बताया गया है कि उसको बाघ ने हमला कर मार दिया और उसके रीढ़ और गर्दन का कुछ हिस्सा खा लिया। उसको खाने के बाद अवशेष शव को वहीं छोड़ कर चला गया। मौके पर बाघ के साथ गैंडे के द्वंद्व के साक्ष्य भी मिले हैं। मौके पर ही गैंडे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया जिसमें उसके शरीर पर बाघ के पंजों के निशान मिले हैं। यह दुधवा में चल रहे राइनो प्रोजेक्ट के लिए दु:खद माना जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शव को वहीं दफना दिया गया है।
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बिसरा प्रिजर्व, तीन चिकित्सकों ने किया पोस्टमार्टम
बाघ के हमले में मरे गैंडे का पोस्टमार्टम डॉ. नेहा सिंघई, डॉ. सौरभ सिंघई और डॉ. बीआर निगम के तीन सदस्यीय पैनल ने किया। उन्होंने पोस्टमार्टम के बाद उसका बिसरा प्रिजर्व कर लिया है।
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कैमरे में भी कैद हुआ बाघ का हमला
गैंडे पर बाघ के हमले की जहां उक्त स्थान गवाही दे रहा है वहीं वहां लगा ट्रिपिंग कैमरा भी इस हमले को कैद कर चुका है। पार्क अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
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फाउंडर मेंबर की बताया जाता है संतान
बाघ के हमले में मरे सहदेव को दुधवा में चल रहे राइनो प्रोजेक्ट के फाउंडर मेंबर की संतान बताया जाता है। राइनो प्रोजेक्ट के फाउंडर मेंबर नर गैंडा बांके और मादा हिमरानी रहे हैं। प्रोजेक्ट में ज्यादातर गैंडे उन्हीं की वंश वृद्धि से हैं।
नर गैंडा सहदेव की मौत बाघ के हमले में हुई है। उसके शरीर पर बाघ के पंजों के निशान और जख्म मिले हैं। कैमरे में हमले के वीजियुल्स कैद हैं। शव का तीन चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया है।-महावीर कौजलगि, डीडी दुधवा, नेशनल पार्क
कोई नया नहीं है बाघ का यूं गैंडे पर हमला
महबूब आलम
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में चल रहे राइनो प्रोजेक्ट में बाघों का गैंडों पर हमला कोई नई बात नहीं है। सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है और इसमें कई गैंडों की जान जा चुकी हैं। वर्ष 2013 में इसी ककरहा ताल के पास एक बाघ ने प्रोजेक्ट की मादा गैंडा पावित्री को हमला कर मार डाला था। इससे पहले भी बाघ कई गैंडों को अपना शिकार बना चुके हैं।
बाघों का गैंडों पर हमला और उनको मार कर खा जाने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। राइनो प्रोजेक्ट पर नजर डाली जाए तो जहां तक रिकार्ड मिलते हैं वहां तक कई ऐसी घटनाएं हो हैं जिनमें गैंडे, बाघों का निवाला बने हैं। अभी चार साल पहले ही वर्ष 2013 के फरवरी माह में पावित्री नाम की मादा गैंडा को इसी स्थान पर एक बाघ ने मार दिया था और कई जगह से उसके मांस को खा गया था। वर्ष 2011 में भी बाघ के हमले में एक गैंडा मारा गया था और इससे चंद दिन पहले एक शिशु गैंडा भी बाघ के हमले में मारा गया था।
तीन माह में दो गैंडों की मौत
दुधवा राइनो प्रोजेक्ट को तीन माह के भीतर दो गैंडों को खोना पड़ा है। दिसंबर वर्ष 2016 को प्रोजेक्ट के नर गैंडे बांके की संघर्ष में मौत हो गई थी तो अब सहदेव की जान गई है।