फर्जी पहचानपत्र दाखिल करने पर हुई कार्रवाई
जालसाजी की अलग दर्ज होगी रिपोर्ट
जुर्माना न भरने पर जारी होगी आरसी
अविवाहिता को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और बाद में फर्जी मतदाता पहचानपत्र के जरिए अदालत को गुमराह करने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस अजय लांबा और रविंद्र मिश्र की खंडपीठ ने आरोपियों की रिट खारिज करते हुए, फर्जी कागजात दाखिल करने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही एसपी खीरी को जालसाजी के मामले में अलग से एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
शहर के मुहल्ला शिवपुरी निवासी विजय जोशी 15 जून को मोहम्मदी कस्बे के एक गांव की अविवाहिता को भगा लाया था। इस मामले में 23 जून को किशोरी के पिता ने विजय जोशी, भाई अजय जोशी, पिता भगवानदीन जोशी और बहन करुणा जोशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चारों आरोपियों ने एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। आरोपियों की ओर से अविवाहिता को बालिग बताते हुए इस रिट के समर्थन में अपहृत अविवाहिता का मतदाता पहचानपत्र भी दाखिल किया था। वहीं अविवाहिता के पिता की ओर से नियुक्त अधिवक्ता मोहम्मद अजीज मंसूरी नें जब इंटरनेट पर मतदाता पहचानपत्र की पड़ताल की तब इस फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ, उन्होंने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करते हुए बताया कि हाईकोर्ट में भी जालसाजी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में खीरी पुलिस को पहचानपत्र के सत्यापन के लिए आदेशित किया था। बुधवार हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फर्जी कागजात दाखिल करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए आरोपियों पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही रिट खारिज करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कहा है।
दर्ज होगी अलग से एफआईआर
डबल बेंच ने अपने फैसले में फर्जी मतदाता पहचानपत्र दाखिल किए जाने पर ही ध्यान केंद्रित रखा, अपने फैसले में हाईकोर्ट ने एसपी खीरी को आदेशित करते हुए इस जालसाजी की दस दिनों के भीतर अलग से रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया है।