चचेरे भाई के साथ कच्चे आम बीनने गई थी पीड़िता
सुलह-समझौता कराने के प्रयास में रही पुलिस
14 घंटे बाद एसपी के हड़काने पर दर्ज की रिपोर्ट
थाना सिंगाही क्षेत्र में गुरुवार की शाम अपने छोटे चचेरे भाई के साथ आम बीनने गई एक 10 साल की बालिका के साथ बाग की रखवाली कर रहे एक 18 साल के युवक ने दुराचार किया। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए घटना के तीन घंटे बाद आरोपी को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन उसका मेडिको लीगल भी नहीं कराया। इतना ही नहीं पुलिस मामले को रफादफा करने में लगी रही। उधर एसपी के हड़काने पर 14 घंटे बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला महिला अस्पताल भेजा है।
थाना क्षेत्र की एक महिला ने बताया कि उसकी पुत्री गुरुवार की शाम करीब पांच बजे अपने सात वर्षीय छोटे चचेरे भाई के साथ घर से करीब आधा किलोमीटर दूर बाग में आम बीनने गई थी। आम बीनते समय वह कीचड़ में गिर गई। बाग की रखवाली कर रहे कसबा निवासी अनूप ने उसे हौजिया में नहाने को कहा। बाद में उसके भाई को अमिया बीनने की बात कहते हुए मौके से हटा दिया और बालिका को लेकर बाग में ही बने एक कमरे में गया। वहां पर बच्ची के सारे कपड़े उतारकर दुराचार किया। इस दौरान बालिका बेहोश भी हो गई। इसी बीच बालिका के मोहल्ले के ही तीन बच्चे भी बाग में बने कमरे के पास पहुंच गए। यह देख आरोपी ने तीनों को धमका कर आम बीनने भेज दिया। बालिका के होश आने पर आरोपी ने उसके छोटे भाई को बुलाकर उसके साथ घर भेज दिया। बालिका के गुप्तांगों से खून का रिसाव होते देख उसकी मां ने जब बालिका से पूछताछ की तो उसने पूरी बात बताई। इस पर मां पीड़िता को लेकर थाने पहुंची और एसओ को पूरी घटना बताते हुए पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज नहीं की, लेकिन सूचना के तीन घंटे के अंदर आरोपी को हिरासत में ले लिया। सुबह जब पीड़िता और उसकी मां थाने पहुंची तो वहां कई लोग समझौते का पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने पहुंच गए। थाने के बाहर बने मंदिर में करीब दो घंटे तक पंचायत चली। इस बीच किसी ने मामले की जानकारी एसपी को दी। एसपी ने एसओ को जमकर फटाकर लगाई। इस पर पुलिस ने शुक्रवार की दोपहर आनन-फानन में आरोपी अनूप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और बालिका को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला महिला अस्पताल भेजा है। उधर महिला डॉक्टरों ने बताया कि मेडिकल की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। बालिका की हालत ठीक है। स्लाइड बनाई गई है, जिसकी जांच के बाद ही साफतौर पर कुछ कहा जा सकता है।
मुझे जानकारी मिली थी कि बालिका के साथ रेप की घटना हुई है और पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। इस पर मैने एसओ को कड़ी फटकार लगाई है। बालिका की मां की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ दुराचार और पाक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
डॉ. एस चन्नपा, एसपी
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आबरू पर वार, पुलिस को नहीं सरोकार
महिला सुरक्षा के लिए कई सख्त कानून होने के बावजूद रेप जैसे मामलों में पुलिस की लापरवाही और उसे दबाने की फितरत से वहशी दरिंदों के हौसले और बुलंद हैं। सिंगाही पुलिस इस मामले में कुछ ज्यादा ही संवेदनहीन है। पिछले कई रेप के मामले इसकी मिसाल हैं। इससे पहले भी ऐेसे मामलों को दबाने की पुलिस ने भरसक कोशिश कर चुकी है। सिंगाही में हुए दलित बालिका के साथ रेप के मामले में पुलिस ने सारी हदें ही पार कर दीं। पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय उसकी आबरू का तमाशा ही बना दिया। गुरुवार की शाम आम के बाग में दुराचार की शिकार हुई बालिका के माता-पिता काफी सीधे-साधेे और बेहद गरीब परिवार के हैं। अपनी बेटी के साथ हुई रेप की घटना के बाद उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सूचना पर तेजी दिखाई और घटना के तीन घंटे के भीतर आरोपी युवक को दबोच लिया और उसे थाने लाकर हवालात की जगह दफ्तर में बैठा दिया। पुलिस ने न तो इस मामले की रिपोर्ट दर्ज की और न ही पीड़िता के घटना के बाद पहने गए कपड़ों को कब्जे में लिया। तुरंत मेडिकल कराने की भी जरूरत नहीं समझी। पुलिस इस आशय से मामले को टलती रही कि मामला सुलह समझौते से निपट जाए। ऐसे हालात भी पुलिस ने पैदा किए। मौका मिलते ही लोगों ने मामले को रफा-दफा करने के लिए पीड़िता के घर वालों पर समझौते का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता थाने के बाहर मंदिर पर घंटो बैठी रही और वहीं पर पंचायत लगाकर लोग समझौते का प्रयास करने लगे। इसी बीच पंचायत होने और घटना की जानकारी एसपी डॉ. एस चन्नपा को हुई तो उन्होंने एसओ को जमकर फटकार लगाई और तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल कराने के निर्देश दिए। इस पर हरकत में आई पुलिस ने आनन-फानन में दुराचार और पाक्सो एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। बाग में पहुंचे मोहल्ले के ही तीनों बालकों को एफआईआर में गवाह बना दिया।
पहले भी कई मामलों में लीपापोती कर चुकी पुलिस
थाना सिंगाही पुलिस करीब छह माह पहले इससे पहले एक किशोरी के साथ हुई घटना की तहरीर देने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी और आरोपी को तीन दिन तक पुलिस हिरासत में रखा था। बाद में मामला सुलट जाने पर पुलिस ने छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी का चालान भेजा था। करीब तीन महीने पहले एक शराबी ने तीन साल की बच्ची के साथ रेप किया था। इस मामले को पुलिस ने दबाने की पूरी कोशिश की। बेहोशी की हालत में पुलिस पीड़िता को लेकर प्राइवेट डॉक्टरों के पास घूमती रही, लेकिन जब डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया तो पुलिस ने निघासन सीएचसी से बच्ची को रेफर कराकर चोरी चुपके जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। मामला अखबारों में जब सुखिर्यों में आया तो पुलिस ने आनन-फानन रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
एसपी को भी एसओ ने नहीं दी सूचना
दुराचार, लूट, चोरी, हत्या आदि जैसी गंभीर घटना होने पर संबंधित थानेदार इसकी सूचना एसपी को देता है। एसपी की गैरमौजूदगी में एएसपी को जानकारी देता है। गुरुवार को बालिका के साथ हुई घटना की सूचना सिंगाही एसओ ने शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े 10 बजे तक नहीं दी। इतना ही नहीं एसओ ने सीओ को भी घटना को बताना जरूरी नहीं समझा। एसपी ने जब सीओ निघासन यशीवर सिंह को घटना बताई और मौके पर जाने के निर्देश दिए तो मामले की जानकारी सीओ को हुई। एसपी डॉ. एन चन्नपा ने बताया कि जब उन्हें किसी से जानकारी मिली तो पहले एसओ से बातकर घटना की जानकारी ली। घटना न बताने पर नाराजगी भी जताई। इसके बाद उन्होंने सीओ को मौके पर भेजा है।