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रेप और आत्मदाह प्रकरण में पुलिस की लापरवाही उजागर

Sat, 16 Jan 2016 11:50 PM IST
लखीमपुर खीरी
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गोला गोकर्णनाथ के गांव में दुराचार से आहत किशोरी के आग लगाकर जान दे देने की घटना के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम कराने में पुलिस की लापरवाही साफ उजागर हुई है। एसडीएम पीके सिंह की जांच में गोला के कोतवाल नेमचंद और सिपाही हनीफ को दोषी करार दिया गया है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट डीएम किंजल सिंह को सौंप दी है। डीएम ने इस पर एसपी अखिलेश चौरसिया से स्पष्टीकरण तलब किया है। डीएम ने शनिवार को पीड़िता के गांव जाकर परिवार वालों को ढांढस भी बंधाया। उन्होंने किशोरी के परिवार वालों को लोहिया आवास स्वीकृत करते हुए 1.37 लाख की पहली किश्त का चेक भी परिजनों को सौंप दिया है। साथ ही रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत 10 लाख का अनुदान देने की भी बात कही।
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एसडीएम ने डीएम को सौंपी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि 13 जनवरी को साढ़े आठ बजे एफआईआर दर्ज होने के बाद पंचनामा भरकर लाश को पोस्टमार्टम हाउस में तो रखवा दिया गया लेकिन डीएम को सूचित नहीं किया गया। इतना ही नहीं डॉक्टरों के पैनल बनाने के लिए भी कोई पहल नहीं की गई। कोतवाल ने सिपाही हनीफ को इसकी जिम्मेदारी देकर पल्ला झाड़ लिया। जांच में यह भी सामने आया कि सिपाही को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि पैनल गठित होगा, साथ ही वीडियोग्राफी की भी व्यवस्था करानी है। इस बात की जानकारी पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ ने 14 जनवरी को देर शाम सिपाही को दी। इस वजह से 14 जनवरी को भी पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। अगले दिन भी शाम हो गई, ऐसे में सूर्यास्त के बाद ‘नाइट पीएम’ के लिए भी लाइट समेत कुछ अन्य व्यवस्थाएं होना थीं, मगर कोतवाल गोला नेमचंद गंगवार ने कोई कदम नहीं उठाया। जांच में इन्हीं बातों को रेखांकित करते हुए एसडीएम ने सिपाही हनीफ और एसएचओ नेमचंद गंगवार को दोषी पाया है।
पीड़िता के घर का हाल देख भावुक हुईं डीएम
लखीमपुर खीरी। कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में दुराचार से आहत किशोरी के आत्मदाह करने और 48 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम की जानकारी के बाद शनिवार की सुबह डीएम किंजल सिंह खुद घटनास्थल पहुंच गईं। वहां पीड़िता के घर का हाल देखकर वह भावुक हो गईं। उन्होंने उसके परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वान दिया। पोस्टमार्टम में देरी पर डीएम ने गांव में ही पुलिस अधिकारियों से सवाल किए। साथ ही ग्रामीणों से महिलाओं और बहू बेटियों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने, समय से पुलिस को सूचना देने के लिए भी कहा। उन्होंने पीड़ित परिवार को लोहिया आवास स्वीकृत करते हुए पहली किश्त का चेक भी बनवा दिया। इससे परिवार के बैंक खाते में सोमवार तक एक लाख 37 हजार पांच सौ की पहली किस्त पहुंच जाएगी। कुल दो किस्तों में दो लाख 75 हजार रुपये मिलेंगे और 30 हजार रुपये सोलर पैनल के लिए मिलेंगे। इसके अलावा डीएम ने 12 कंबल पीड़ित परिवार को दिए। डीएम के निर्देश पर सहायक श्रमायुक्त ने दो साइकिलें भी पीड़ित परिवार को दीं।
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पुलिस के सूचना न पहुंचाने पर एसपी को लिखा पत्र
दुराचार पीड़िता के आत्मदाह करने जैसे गंभीर मामले में पुलिस द्वारा सूचना न दिए जाने और पोस्टमार्टम में हुई देरी पर डीएम किंजल सिंह ने एसपी अखिलेश चौरसिया को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा है कि पुलिस द्वारा जिला प्रशासन को सूचना देने में पहले भी शिथिलता बरती जाती थी, इस पर वह पांच मार्च 2015 को भी पत्र लिख चुकी हैं। उस समय प्रभारी जिला कंट्रोल रूम को आदेशित भी किया था कि ऐसे प्रकरणों की सूचनाएं तुरंत उनके डीएम के कैंप कार्यालय पर और विक्टर मोबाइल पर अवगत कराई जाए। उन्होंने लिखा है कि इस मामले में चूंकि दुराचार और आत्मदाह मामले में सांप्रदायिक कारण थे, फिर भी उन्हें सूचना न दिया जाना गंभीर है।
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डीएम ने एसपी से किए सवाल
1. पैनल पोस्टमार्टम का आदेश किसके स्तर से होना था? क्यों तत्काल नहीं कराया गया?
2. किन कारणों से नाइट पीएम की संस्तुति कोतवाल द्वारा नहीं की गई?
3. कौन अधिकारी थे, जिन्हें मामले का सुपरवीजन करना था और वह शिथिल रहे?
4. वीडियोग्राफी किसके स्तर से कराई जानी थी?
5. विभाग द्वारा कौन वीडियोग्राफर हायर किया गया?
6. वह समय से उपलब्ध क्यों नहीं हुआ? इसके लिए उत्तरदायी कौन है?
डीएम संग यह अधिकारी भी गए
डीएम संग सीडीओ नितीश कुमार, एडीएम गोला विनोद कुमार गुप्ता, तहसीलदार गोला, सीओ एसी श्रीवास्तव और कोतवाल नेमचंद गंगवार दल बल के साथ पहुंचे।

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