जेल की टीम के हाथ भी रहे खाली
जिला जेल से फरार हुए रेप और हत्या के आरोप में बंद कैदी मोहन कश्यप तीसरे दिन भी पुलिस के हाथ नहीं चढ़ सका। पुलिस की टीमों ने कई स्थानों पर छापेमारी की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। वहीं गांवों और खेतों की धूल फांक रही जिला जेल के बंदी रक्षकों की टीम को भी ऐसे कोई सुराग नहीं मिले, जिससे उसके हाथ फरार आरोपी तक पहुंच सके।
31 अक्तूबर की शाम आठ वर्षीय बालिका की रेप के बाद हत्या के आरोप में गांव का ही आरोपी मोहन कश्यप जेल की सलाखों के पीछे से रहस्यमय हालात में फरार हो गया था। सदर कोतवाली पुलिस ने जेल अधीक्षक की ओर से आरोपी के खिलाफ फरारी का केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। सदर कोतवाल दीपक शुक्ल ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तार करने के काफी प्रयास किए गए, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस की टीमें उसकी सुरागरसी में लगी हुई हैं। उधर जेल अधीक्षक की ओर से सुरागरसी के लिए गठित चार सदस्यीय बंदी रक्षकों की टीम भी सादी वर्दी में धूल फांक रही हैं, लेकिन टीम को भी कोई ऐसे क्लू नहीं मिले हैं, जिससे उसके हाथ आरोपी के गिरेबां तक पहुंच सके।
फरार होने का समय नहीं उतर रहा पुलिस के गले
कड़ी चौकसी के बीच आरोपी मोहन कश्यप की जेल से फरार होने को लेकर अब भी रहस्य बरकरार है। सदर कोतवाल दीपक शुक्ल का कहना है कि जेल अधीक्षक की ओर से उसके फरार होने का समय 31 अक्तूबर की शाम 6.15 मिनट बताया जा रहा है, जो पुलिस के गले नहीं उतर रहा है। उनका मानना है कि आरोपी बताए जा रहे समय से पूर्व ही जेल से निकल गया। उन्होंने बताया कि आरोपी के पकड़े जाने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।