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अब गोला रेंज में हुआ सागौन का कटान, फायरिंग भी हुई

Mon, 19 Sep 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोला गोकर्णनाथ/बिजुआ (खीरी)।
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tree - फोटो : amar ujala
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- रायपुर बीट में लकड़ी लदी पिकअप बरामद, दोनो पक्षों से हुई फायरिंग
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- रात भर वन महकमे और तस्करों के बीच चलता रहा छिपा-छिपी का खेल
- दो दिन पहले भीरा रेंज में कटे थे चार सागौन के पेड़
खीरी के जंगलों में तस्करों का ग्रहण लगा है। भीरा रेंज में सागौन के चार पेड़ों कटान के तीसरे दिन गोला रेंज में भी सागौन के पेड़ काटे गए। पेड़ काटे जाने के दौरान रात को ही किसी मुखबिर की सूचना पर वन महकमे के लोग मौके पर पहुंचे, तो एक पिकअप पर पेड़ों को काट-काटकर लादा जा रहा था। फोर्स की कमी के चलते दो घंटे तक वन कर्मचारी अंधेरे में छिपकर अपने पेड़ों पर आरा चलते देखते रहे। रात करीब दो बजे फोर्स पहुंचने पर लकड़ी तस्करों को घेरने की कवायद शुरू हुई, तभी तस्कर  फायरिंग कर मौके से भाग खड़े हुए, ग्रामीणों की माने तो दो दर्जन राउंड तक फायर हुई। मौके पर एक पिकअप में भारी-भरकम पेड़ की लकड़ी और दो आरे मिले हैं।
गोला रेंज के रायपुर बीट के कपांर्टमेंट नंबर दो में रविवार-सोमवार रात के बीच लकड़ी तस्करों ने सागौन के तीन पेड़ काट डाले,  इन पेड़ों को ले जाने के लिए एक पिकअप यूपी31टी 7289 पलिया के किसी दीपक गुप्ता की गाड़ी जंगल में मौके पर लाई गई थी। यह सूचना वनरक्षक को दूसरे जरिए ही मिली, जंगल में पेड़ों के कटान की सूचना पर रेंजर उमेश चंद्र राय ने डीएफओ साउथ डिवीजन अखिलेश पांडे को जानकारी देकर फोर्स मांगा। दो घंटे बाद पड़ोसी वन चौकी अंदेशनगर एवं रामनगर बीट से फोर्स आने पर जब वन कर्मी मौके पर पहुंचे तो देखा कि एक डीसीएम पर पेड़ लादे जा रहे हैं। फोर्स की घेराबंदी के बीच वन तस्करों को भनक लगने से तस्कर फायर कर भागने लगे, इस बीच दोनो पक्षों में करीब 15 राउंड फायरिंग हुई। मौके पर एक पिकअप और दो आरे मिले हैं। लकड़कट्टे अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल में फरार हो गए। इस बीच रेंजर उमेश चंद्र राय भी पहुंचे, पिकअप को गोला रेंज कार्यालय ले जाया गया है। पिकअप में मिले रजिस्ट्रेशन के आधार पर गाड़ी मालिक पलिया निवासी दीपक कुमार गुप्ता की पहचान हुई है। रेंजर ने वाहन को  सीज करके अज्ञात लकड़कट्टों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिसका शीघ्र खुलासा किया जाएगा। पिछले माह उन्होंने अभियान चलाकर दो पिकअप और एक ट्रैक्टर ट्रॉली को सीज किया था।
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पहले भीरा अब गोला में कटान... रेंज बदली, लेकिन तरीका एक ही
बिजुआ। भीरा रेंज में चार पेड़ काटने के मामले में वन महकमा इस बात पर जोर देता रहा कि ये कटान महज इंसानी रंजिश यानी दूसरे को फंसाने के लिए पेड़ों को निशाना बनाया गया है। भीरा रेंजर के बयान के अगले दिन गोला रेंज में भी तीन पेड़ कट गए, दोनों जगह कटान में एक चीज कॉमन है कि पेड़ की लकड़ी तस्कर नहीं ले जा सके, लेकिन भीरा में जहां मौके पर कोई वाहन नहीं मिला था और खुलासा दिन में हुआ। इस मामले में गोला रेंज का रिकॉर्ड थोड़ा सा अच्छा रहा, यहां पेड़ कटे जरूर, लेकिन मौके पर एक वाहन मिला और तस्करों से गोलीबारी भी हुई। हालांकि वन अधिकारी लीपापोती करने के लिए कुछ भी कहें, फिलहाल कटान से यही लगता है कि  मिलीभगत से हो रहा था। किसी वजह से लकड़ी नहीं निकल पाई, जिससे मामला सामने आ गया।
साउथ खीरी डिवीजन के भीरा रेंज में सागौन के चार पेड़ काटे जाने के तीसरे दिन गोला रेंज में भी तीन पेड़ काटे गए। दोनों घटनाओं को देखकर तो यही लगता है कि भीरा रेंज में लकड़ी ले जाने में असफल रहने वाले वन तस्करों ने इस बार गोला रेंज को चुना था, लेकिन किस्मत खराब थी कि उनकी मुखबिरी हो गई। जिन दोनों जगहों पर लकड़ी काटी गई है, उनके बीच करीब 15 किमी का फासला है। काटे गए पेड़ों की गोलाई दोनों जगहों पर हैवी है। अगर गोला रेंज में कटान का मामला न खुलता तो यकीनन भीरा रेंज का मामला 'इंसानी रंजिशों' के बीच का ही फाइलों में दबकर रह जाता। इस केस के बाद अब उम्मीद बढ़ गई है कि विभाग  'रंजिशों' को छोड़कर तस्करों पर भी निगाह गड़ाएगा। 

पकड़े गए वाहन से खुलेगा राज, पकड़ में आएंगे तस्कर
बिजुआ। गोला रेंज में जंगल के भीतर मौके पर पकड़ी गई एक पिकअप से राज खुलेगा। विभाग पिकअप मालिक से यह जानेगा कि किसने पिकअप बुक कराई थी। कहीं ऐसा तो नहीं है कि जिसकी गाड़ी है उसी के जरिए तस्करी हो रही हो। 

पहले से हुई होगी रेकी, तभी तस्कर पहुंचे इस जगह पर
बिजुआ। लकड़ी तस्करों ने जिन पेड़ों को निशाना बनाया है वह जंगल के कुछ ही भीतर हैं, इस रास्ते तक पैदल या दोपहिया वाहन से ही जाया जा सकता है। तीन भारी-भरकम पेड़ों को काटने से पहले यकीनन रेकी हुई होगी, तस्करों ने चौपहिया वाहन के पहुंचने के रास्ते ढूंढे। मुख्य रास्ते पर खंदक गली होने से पास के गन्ने के खेत से पिकअप को जंगल लाया गया, इस रास्ते पर निकलने के लिए ईंटें भी लगाई गईं। 

नहीं तो लकीर पीटता विभाग
बिजुआ। मुखबिरी से एक्शन हुआ हो या फिर वजह चाहें कुछ और ही हो, यदि वाहन समेत लकड़ी न पकड़ी जाती तो बहाने कुछ और होते। अधिकारी लकीर पीटते नजर आ रहे होते। खास बात यह है कि जिस समय पेड़ काटे जा रहे थे, उस समय पूरा का पूरा वन महकमा सो रहा था, वन रक्षक के फोन पर एक कॉल आई, क्षेत्रीय वन कर्मचारी सोते से जागे, पहले वचन दरोगा को सूचना दी। फिर से मामला सुर्खियों में आ गया। 

गोला रेंज में इस स्थान पर पहले भी होता रहा है कटान
बिजुआ। जंगल के रास्ते को आबादी से जोड़ने वाला यह रास्ता तस्करों के लिए मुफीद है। पिछले कई सालों से इसी रास्ते से ही जंगल में सागौन का कटान होता है। करीब तीन साल पहले भी एक डीसीएम तभी पकड़ी गई थी, जब वह जंगल में धंस गई थी। इसके अलावा पखवारा भर पहले भी दो पेड़ों का कटान हुआ था। आए दिन इसी  रास्ते से जुड़े जंगल कट रहे हैं। 

सालों से एक ही जगह पर जमे कर्मचारी कहीं वजह तो नहीं
बिजुआ। जंगल के भीतर से सागौन के पेड़ कटने में लोकल कनेक्शन से इंकार नही किया जा सकता, लेकिन इस कनेक्शन में विभाग में कई सालों से एक ही जगह पर जमे कर्मचारियों के जुड़ने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता।
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गोला रेंज के रायपुर बीट में कटान हुआ है। वन विभाग की टीम को देखते ही लकड़कट्टों ने फायरिंग शुरू कर दी। वनकर्मियों ने भी लकड़कट्टों पर फायरिंग की। लकड़कट्टे अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। फरार लकड़कट्टों को पकड़ने के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। 24 घंटे के अंदर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 
- अखिलेश पांडेय, डीएफओ साउथ
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