बाद में पुलिस को देख मौके से भाग निकले
जंगल से बेशकीमती लकड़ी काटकर डनलप से ले जा रहे लकड़कट्टों ने मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम और मझर्गइं वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) को बंधक बना लिया। इसी बीच गश्ती पुलिस के मौके पर पहुंचने पर आरोपी डनलप मौके पर छोड़कर भाग निकले। एसओ मनोज सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया था, वनविभाग ने कोई तहरीर नहीं दी है।
थाना क्षेत्र के गांव धर्मापुर के पास स्थित जंगल पर लकड़कट्टों की नजर है। जंगल से लकड़कट्टे बड़े पैमाने पर बेशकीमती पेड़ों का कटान कर बिक्री करते हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद वन विभाग हरकत में आया और गश्त तेज कर दी। रविवार रात करीब तीन बजे आधा दर्जन से अधिक लकड़कट्टे लकड़ी काटकर डनलप से बम्हनपुर की ओर आ रहे थे। धर्मापुर मोड़ के पास मझगईं वन रेंज के दो वनकर्मियों ने डनलप रोक लिया। इससे गुस्साए लकड़कट्टों ने उन्हें घेरकर बंधक बना लिया। इसकी जानकारी जब रेंजर राधेश्याम को लगी तो वह भी आनन-फानन में मौके पर पहुंच गए। बेखौफ लकड़कट्टों ने रेंजर को भी बंधक बना लिया। इसी बीच थाने के सिपाही हेमंत यादव साथी सिपाही के साथ गश्त करते हुए मौके पर पहुंच गए। पुलिस को आते देख लकड़कट्टे वनकर्मियों, रेंजर और डनलप मौके पर छोड़कर भाग गए। सिपाही हेमंत यादव ने बताया कि वनविभाग की टीम ने डनलप सहित लकड़ी को कब्जे में लिया है। एसओ ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। लकड़ी माफिया खैरहनी के थे, लेकिन वन विभाग ने कोई भी तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
वनविभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
एक तरफ जहां लकड़कट्टों द्वारा रेंजर और वनकर्मियों को बंधक बनाने की पुलिस पुष्टि कर रही है। वहीं दूसरी तरफ वन विभाग पूरे मामले पर चुप्पी साधे है। रेंजर राधेश्याम ने कुछ कहने से इंकार कर दिया। वनकर्मियों की चुप्पी ने वनविभाग को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।