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झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से ग्रामीण की मौत

Mon, 15 Jun 2015 06:23 PM IST
सिंगाही।
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गांव सिन्हौना में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से एक ग्रामीण की मौत हो गई। ग्रामीण की मौत होने के बाद से आरोपी झोलाछाप फरार हो गया। वहीं पुलिस मामले में शिकायत के बावजूद टालमटोल करती रही। आरोप है कि एक सिपाही ने पोस्टमार्टम कराने के लिए रुपये की मांग भी की, जिस पर ग्रामीण भड़क गए। हालांकि एसपी अरविंद सेन के निर्देश के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए बाद में भेजा।
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गांव सिन्हौना निवासी सुरसत्ता के अनुसार उसके 35 वर्षीय बेटे रमाकांत को रविवार की शाम बुखार आ गया, जिस पर वह गांव के झोलाछाप डॉक्टर के पास गया। आरोप है कि डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगा दिया। थोड़ी ही देर में रमाकांत बेहोश होकर गिर गया तो सुरसत्ता ने डॉक्टर को बुलाया। झोलाछाप ने रमाकांत की नब्ज देखी और उसे अन्यत्र ले जाने को कहा। आरोप है झोलाछाप ने उसे मृत भांपकर यह कहा। सुरसत्ता बेहोश पड़े बेटे से चिपकर दहाड़े मारकर रोने लगी। कुछ ही देर में आरोपी डॉक्टर मौके से खिसक लिया। शोर सुनकर तमाम ग्रामीण आ गए। ग्रामीणों की मदद से रमाकांत का शव उसके घर पर लाया गया। परिवार वालों ने घटना की नामजद तहरीर पुलिस को रविवार की रात करीब नौ बजे दी। ग्रामीणों के काफी प्रयास के बाद सोमवार सुबह करीब आठ बजे एक दरोगा और दो सिपाही गांव पहुंचे। पुलिस के शव का पंचनामा भरने में टालमटोल करने पर ग्रामीणोें ने एसपी को फोन पर मामले की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, हालांकि रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
रमाकांत अपने पीछे दो बेटियां छोड़ गया हैं, जबकि उसकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। इसके अलावा परिवार में मां है।
सीएचीसी प्रभारी एसआर वर्मा के अनुसार बीमारी की जांच किए बिना ही झोलाछाप ने दूसरी मर्ज की दवा दे दी होगी। तेज बुखार में ज्यादा हार्ड दवा नहीं देनी चाहिए। यह प्राण घातक भी सिद्ध हो सकती है।
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सीओ निघासन मोहम्मद इब्राहिम के अनुसार शव का पंचनामा भरने में कुछ देरी हो गई थी। तहरीर मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।

निघासन में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार
निघासन। निघासन में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। यह झोलाछाप डॉक्टर मासूम जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। क्षेत्र में बीते चार माह में आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान यह कथित डॉक्टर ले चुके हैं।
क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होने और डॉक्टरों की कमी के चलते यहां पर झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ती जा रही है। झोलाछाप डॉक्टरों को शुद्ध हिंदी लिखना भी नहीं आता पर ये बड़ी बीमारियों का इलाज करने का दावा करते हैं। इतना ही नहीं यहां पर कुछ ऐसे झोलाछाप डॉक्टर हैं जो दवा दूसरों से लिखवाते हैं। पढ़े-लिखे न होने के कारण वे लाल और पीली दवा बताकर खाने के लिए देते हैं। ये डॉक्टर अपना मेडिकल स्टोर लेकर गांव-गांव घूमते हुए किसी भी समय देखे जा सकते हैं। कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जिन्होंने छप्पर और किराए के घरों में दुकानें खोल रखी हैं।
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