राजापुर चौकी क्षेत्र के युवक के फर्जी एनकाउंटर का मामला
राजापुर चौकी क्षेत्र के युवक को खूंखार अपराधी बताते हुए फर्जी एनकाउंटर में मार डालने के मामले में जिला जज राजवीर सिंह ने आरोपी दरोगा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए डीजीसी क्रिमनल शिवराज यादव ने बताया कि 30 मई 1989 को ग्राम राजापुर के रहने वाले कामता को राजापुर चौकी के सिपाही अशोक सिंह और लल्लू सिंह पकड़कर ले गए थे। अगले दिन दोनों सिपाहियों ने कामता के घर पहुंचकर जानकारी दी कि कामता का ईसानगर थाना क्षेत्र में एनकाउंटर कर दिया गया है। आरोपी दरोगा रामचरन मौर्य उस समय ईसानगर के एसओ थे। डीजीसी ने बताया कि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी जिस दरोगा पर थी, उसी ने कानून हाथ में लेते हुए हत्या जैसा जघन्य अपराध किया है। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शकील अहमद सिद्दीकी ने दरोगा आरसी मौर्य को निर्दोष बताते हुए कहा कि एनकाउंटर ईसानगर में होने के कोई साक्ष्य नहीं दाखिल है न ही आरोपी दरोगा ने कामता को पकड़ा था, साथ ही बताया कि दशकों पुराना मामला परिवाद पर आधारित है। जिला जज राजवीर सिंह ने सुनवाई के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
27 साल से फरार चल रहे हैं हत्यारोपी पुलिसकर्मी
मामले में आरोपी अशोक सिंह और लल्लू सिंह, तो कानूनी शिकंजे के पहले ही दिवंगत हो गए। तत्कालीन शहर कोतवाल हत्यारोपी ओमप्रकाश वर्मा, तत्कालीन चौकी प्रभारी राजभारत सिंह परिहार अभी भी पकड़ से बाहर है।
सीजेएम की सख्ती सेे हुई कार्रवाई
युवक को एनकाउंटर के नाम पर मार गिराने वाले पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार करने के लिए 25 सालों से कागजी लिखा-पढ़ी चल रही थी, लेकिन असल हकीकत में पुलिस अधिकारियों की मंशा ही कुछ और थी हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। मौजूदा सीजेएम डॉ. दीनानाथ ने इस पुरानी पत्रावली में इंसाफ के लिए दौड़ रही कामता की विधवा कमला की गुहार सुनी और सीओ सिटी के नेतृत्व में गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कराई।