बदायूं के उझानी कोतवाली में जिस छात्रा को सिपाही ने छत से फेंका था, वह कोतवाली के पीछे वाले दूसरे गेट से आती-जाती थी। अब उस गेट को बंद कराया गया है लेकिन खीरी जिले की सदर कोतवाली कम असुरक्षित नहीं है। यहां कोतवाली में दाखिल होने के लिए मुख्य गेट के अलावा दो और रास्ते हैं। इनसे आने-जाने वाले लोगों से कोई पूछताछ तक नहीं होती है। यही नहीं, कोतवाली आने वाले लोगों की इंट्री भी रजिस्टर में दर्ज नहीं की जाती है।
सदर कोतवाली की पाकशाला के पास दो लोगों के एक साथ निकलने की जगह है। इसमें गेट भी नहीं लगा है। लोगों की आवाजाही होती रहती है। वहीं सदर कोतवाली के पिछले हिस्से में भी तीन गेट हैं। अंदर बने कमरे पुलिसकर्मियों के आवास से होते हुए कोतवाली के दफ्तर से जुड़े हैं। कोतवाली के मुख्य दरवाजे के अलावा शहर कोतवाल के आवास का दरवाजा सड़क पर खुलता है। इनसे कब और कौन-कौन निकलता है, कोतवाली पुलिस के पास इसका रिकार्ड नहीं है।