अदालत में गलत बयानी करने वालों पर कोर्ट सख्त हो गया है। विवाहिता की पीटकर हत्या करने के मुकदमे में फैसला सुनाते हुए अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में हत्यारोपी पति को बरी तो कर दिया, लेकिन अदालत में गलत बयान देने वाले गवाहों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गवाही से मुकरने वाले तीन अहम गवाहाें को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए तलब किया है।
बताते चलें फरधान थाना क्षेत्र के ग्राम पट्टीपुरवा मजरा पड़रिया कलां के रहने वाले जुम्मन ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसके गांव का रहने वाला शेरा अपनी पत्नी मंजीत को आपसी वाद विवाद के चलते पांच जनवरी 2013 को झगड़ रहा था, घर में मारपीट कर रहा था। महिला के शोरगुल पर अन्य ग्रामीणों के साथ वह भी पहुंचा था तो मंजीत खून से लथपथ बेहोश थी। जिसे गांव वालों की मदद से ससुर मकसूद ने इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान मंजीत की मृत्यु हो गई। अदालती सुनवाई के बीच जुम्मन, मकसूद, इदरीश तो अपने बयानों से पलट लिहाजा औपचारिक गवाहों से शेरा के खिलाफ अपराध साबित न हो सका। एडीजे एमजी मदार ने सारे पहलुओं को रेखांकित कर हत्यारोपी शेरा को संदेह का लाभ देकर बरी करने का फैसला सुनाया है, साथ ही अदालत में गलत बयान देने वाले जुम्मन, मकसूद और इदरीश को 344 सीआरपीसी की नोटिस जारी कर तलब किया है।
ऐसे फंस गया पेच
जुम्मन खां ने तहरीर में बताया, मंजीत की मौत के बारे में जो बताया उससे उलटा अदालत में बयान दिया तो वहीं इदरीश ने पंचनामा के दौरान जो बातें पुलिस को बताई थीं, उससे उलट अदालत में बयान दिया। इसके अलावा वहीं कुल्हाड़ी का बेट हत्यारोपी की निशानदेही पर बरामद होने की बाबत पुलिस को बयान देने के बावजूद कोर्ट में अपनी गवाही से इदरीश मुकर गया। इन तीनों के खिलाफ विरोधाभाषी आचरण प्रकट करने की बात कहते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।