खैरीगढ़ गांव में छाई रही मायूसी और बेबसी
छुट्टी के दिन प्रशासन से राहत भी नहीं पहुंची
मदद करने वाले आज खुद हाथ फैलाने को मजबूर
सोमवार को उठे शोलों ने खैरीगढ़ गांव को तबाह कर होली के खुशियों के रंग छीन ही लिए, होली की छुट्टी ने खैरीगढ़ के ग्रामीणों को मिलने वाली ‘राहत’ भी छीन ली। होली की मस्ती में डूबे प्रशासनिक अमले ने बुधवार को खैरीगढ़ में झांकने की जहमत तक नहीं उठाई और ग्रामीणों के लिए राहत सामग्री नहीं भिजवाई गई। कुछ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने जरूर गांव में राहत सामग्री भिजवाई और ग्रामीणों का ध्यान रखा। बताते चलें, सोमवार को लगी आग में खैरीगढ़ के चार सौ घर राख हो गए हैं। इस अग्निकांड में चार लोगों की मौत हुई है। आग ने इस गांव पर ऐसा कहर बरपाया कि कभी दूसरों की मदद करने वाले हाथ आज खुद हाथ फैलाने को मजबूर हैं।
सोमवार को हुए अग्निकांड के बाद खैरीगढ़ में अभी भी मायूसी छाई हुई है। खैरीगढ़ के लोगों ने कभी सोचा नहीं था कि इस बार कि होली उनके लिए ये दर्द लेकर आएगी। 70 वर्षीय चुरई बताते हैं कि उनके गांव में दोनों समुदाय के लोग होली मनाते हैं। होली की तैयारियां एक माह पहले से शुरू हो जाती हैं। इस बार आग के कहर ने होली की खुशियों को मातम में बदल दिया। इसी गांव के कनौजी ने बताया कि पता नहीं क्यों अग्नि देवता इतना रूठ गए कि पूरे गांव को राख में बदल दिया। शिवसागर ने कहा कि जो लोग दूसरों की मदद करते थे वह आज दूसरों के आगे हाथ फैलाने को मजबूर हैं। हालांकि समाजसेवी संगठन आग से तबाह हुए लोगों की मदद कर रहे हैं, लेकिन यह मदद उनके लिए नाकाफी साबित हो रही हैं। उधर, होली की छुट्टी के चलते प्रशासनिक अमले बुधवार को गांव की सुधि नहीं ली। न तो अधिकारी पहुंचे और न ही तैनात किए गए कर्मचारी। अधिकारियों का कहना है कि लेखपालों को लगाया गया था। अगर वह नहीं पहुंचे हैं तो जांच कराई जाएगी।
यानी बैंक खुलेगा तब खाना खाएंगे अग्निकांड पीड़ित?
एक तरफ आग से चार सौ घर तबाह हो गए वहीं दूसरी तरफ नियमों की आड़ में प्रशासन संवेदनहीन होकर अग्निकांड पीड़ितों को राहत देने से पल्ला झाड़ रहा है। बुधवार को प्रशासनिक अमला खैरीगढ़ नहीं पहुंचा और ग्रामीणों को राहत सामग्री और खाने पीने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का इंतजार करना पड़ा। यह हाल तब है जब घरों में न दाना बचा है और न ही खाना पकाने को बर्तन। प्रशासन का कहना है कि दैवीय आपदा के राहत के रुप में दिए जाने वाले 7900 रुपये के चेक से ही पीड़ितों को अपने लिए व्यवस्था करनी है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि प्रशासन रोज लंच पैकेट बंटवाए। पूरी तरह तबाह हो चुके ग्रामीणों को 7900-7900 रुपये का चेक देकर प्रशासन यह भूल गया है कि बुधवार से रविवार तक बैंकों में छुट्टी है और सोमवार को जब बैंक खुलेंगे तब ग्रामीण चेक जमा करा पाएंगे। चेक क्लीयर होगा तब खाते में पैसा आएगा और ग्रामीण तब अपने लिए दाना पानी की व्यवस्था कर पाएंगे। एक ग्रामीण का कहना है कि क्या रविवार तक चेक को देख-देख कर ही अपना पेट भरेंगे। बुधवार को कोई भी नहीं आया। कुछ समाजसेवी संगठन जरूर पहुंचे तो खाना नसीब हुआ।
दो दर्जन से अधिक लोगों को नहीं मिली चेक
प्रशासन भले ही आग से तबाह हुए 741 परिवारों को राहत का चेक बांटे जाने का दावा कर रहा हो लेकिन यहां के राजेंद्र श्रीवास्तव, महादेव, राहुल, रामकली, छैलबिहारी, अमरीक, मुनउवर, ज्ञान बहादुर आदि ने बताया कि करीब दो दर्जन से अधिक लोगों को चेक नहीं मिली हैं।
अग्निकांड में सरकारी व्यवस्था और नियम है, उसमें 4100 रुपये घर बनाने, 2000 रुपये अनाज, 1800 रुपये बर्तन अन्य खर्चों के लिए होते हैं। रोज लंच पैकेट बंटवाने का कोई नियम नहीं है। एसडीएम और तहसीलदार को स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए मदद कराने के निर्देश दिए गए हैं।
एसपी सिंह, अपर जिलाधिकारी
गांव में लेखपालों की ड्य्टी लगाई गई है। बुधवार की सुबह गांव में लेखपालों के होने की सूचना थी। यदि कोई लेखपाल गांव में नहीं है तो जांच की जाएगी।
- लव कुमार, एसडीएम-निघासन
तीसरे दिन भी सुलगती रही आग
खैरीगढ़ में तीसरे दिन भी एक थम्हण सुलगता रहा। गांव के लोगों ने पानी डालकर आग बुझाई।
बसपा की ओर से बांटी गई राहत सामग्री
बसपा विधानसभा क्षेत्र प्रभारी कयूम ने एक बार फिर गांव पहुंचकर आग से तबाह हुए लोगों को लंच पैकेट और साड़ियां बांटीं। इसके अलाव बचे हुए अन्य लोगों को तिरपाल भी दिए। उन्होंने बताया कि यह राहत सामग्री बराबर पीड़ितों को दी जाएगी। कयूम ने प्रदेश सरकार से आग से पीड़ित लोगों को इंदिरा आवास और 20 हजार रुपये की त्वरित सहायता देने की मांग की है। उधर, कस्बे के इस्लामिया स्कूल की कमेटी के लोगों ने प्रभावित लोगों को लंच पैकेट, शकर, दाल, नमक, बिस्कुट, आलू, प्याज, बर्तन, दरी, कंबल आदि बांटा। कमेटी के सदस्य मिस्बाहुद्दीन ने बताया कि प्रत्येक घर में सारी सामग्री भिजवाई गई है।