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बाढ़, बीमारी के बाद बड़ी त्रासदी है आग 

Thu, 07 Apr 2016 10:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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अाग - फोटो : अमर उजाला
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एक महीने में 17.18 करोड़ की संपत्ति राख
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खैरीगढ़ में चार मनुष्यों के लिए काल बनी आग 
15 मनुष्यों और 30 पशुओं को आग से बचाया गया
तराई इलाके में बाढ़ और बीमारी के बाद आग सबसे बड़ी त्रासदी बन गई है। खासकर गर्मी के मौसम में घास-फूस की झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के  लिए इस त्रासदी से बचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। पिछले एक महीने में जिले में आग की 105 घटनाएं हो चुकी हैं। जिसमें 17.68 करोड़ रुपये की संपत्ति राख हो गई और खैरीगढ़ जैसे भीषण अग्निकांड में चार लोग जिंदा जल गए। आग में मरने वालों का आंकड़ा और भी बड़ा होता लेकिन इस त्रासदी में लोगों की एकजुटता के कारण 15 लोगों और 30 पशुओं की जान बचाई ली गई। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी और फरवरी माह में 67 अग्निकांड हुए हैं। वहीं मार्च में आग की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। अग्निशमन के अधिकारी आग की बढ़ती घटनाओं को बारिश कम होने से जोड़ रहे हैं, उनके मुताबिक बारिश न होने की वजह से गांवों में तालाब-पोखर सूखे हुए हैं। गांवों में जलश्रोतों की कमी होने की वजह से मार्च में आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी है। 

ग्रामीणों की लापरवाही भी पड़ रही भारी 
खीरी जिले में साल दर साल आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जिनमें न सिर्फ संपत्ति राख हो रही है बल्कि जनहानि भी हो रही है, लेकिन लोगों की लापरवाही और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। दोपहर के समय खाना बनाना, जलती हुई आग को छोड़कर चले जाना, बीड़ी-सिगरेट पीते समय जलती हुई तीली को फेंक देना, चूल्हे की जलती हुई राख को कूड़े में फेंकना सहित तमाम लापरवाही बड़ी-बड़ी अग्निकांडों की वजह बन रही है।  
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मार्च में सबसे ज्यादा लगी आग 
-सदर तहसील 41 
-धौरहरा तहसील-25
-गोला तहसील-21
-निघासन तहसील-12
-पलिया तहसील-छह 

दो महीने में हुए नुकसान का आंकड़ा 
माह              नुकसान           बचाया 
फरवरी-          8715000         35410000
मार्च-           17182000         37269000

चालकों की कमी आग बुझाने में बड़ी बाधा 
अग्निशमन विभाग के पास आग बुझाने के लिए गाड़ियां तो हैं, लेकिन उन गाड़ियों को गांवों तक पहुंचाने के लिए चालक नहीं हैं। विभाग में चालकों की बड़े पैमाने पर कमी है। लखीमपुर अग्निशमन केंद्र पर दो बड़े और एक छोटे वाहन को चलाने के लिए सिर्फ एक चालक है। यहां छह अग्निशमन अधिकारी की तुलना में एक ही अग्निशमन अधिकारी तैनात है। इसी तरह गोला, पलिया, निघासन और धौरहरा में दो-दो वाहन हैं, लेकिन वहां भी एक-एक चालक ही है। अग्निशमन केंद्रों पर कर्मचारियों की भी भारी कमी है। लखीमपुर में कुल 34 में 18 प्रशिक्षित सिपाही हैं तो 16 सिपाही ऐसे हैं, जो अभी व्यवहारिकता का प्रशिक्षण ले रहे हैं। गोला, पलिया, निघासन और धौरहरा में एक-एक हेड, एक-एक चालक और दो-दो सिपाही तैनात हैं।   
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डीएम-एसपी का प्रस्ताव भी ताक पर रखा 
अग्निकांड की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मार्च महीने में डीएम और एसपी ने अग्निशमन विभाग के लिए चालकों और सिपाहियों की कमी को पूरा करने के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उनके प्रस्ताव को भी ताक पर रख दिया गया है। एसपी अखिलेश चौरसिया ने चार मार्च को प्रस्ताव भेजकर कहा था कि अगर सिपाहियों को यहां तैनात करना मुमकिन न होते तो सिर्फ तीन महीने के लिए ही सिपाहियों की संख्या बढ़ाई जाए। तत्कालीन डीएम किंजल सिंह ने 26 मार्च को प्रस्ताव भेजा था। 
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