- शादी के ही लाल जोड़े में पूजा की अर्थी अंकुर के साथ उठी
- भीरा के अंकुर-पूजा की रविवार रात गुड़गांव में दुर्घटना में मौत
जिन हाथों ने तीन दिन पहले अंकुर के सिर पर सेहरा बांधा था, मंगवार को उन्हीं कंधों पर दो-दो जनाजे थे। गलियां वहीं थीं, लोग वही थे, इस मंजर को देखकर सख्त दिल भी सिसक उठे। तीन दिन पहले अंकुर सिर पर सेहरा सजाकर पूजा को ब्याहने के लिए निकला था, आज वही पूजा उसके साथ आखिरी सफर पर थी। इस दुनिया में कुदरत ने उन्हें साथ रहने को महज 48 घंटे ही दिए थे। घर वालों ने कहा कि कुदरत को यही मंजूर था तो एक ही चिता पर दोनों को इस दुनिया से विदा करेंगे।
सोमवार रात को जब भीरा में अंकुर और पूजा के शव पहुंचे, हर आंख नम थी। शव पहुंचने से कुछ देर पहले ही मां को भी बता दिया गया कि उनका अंकुर अब नही रहा, मां की तड़पन किसी से देखी नहीं गई। भाई खामोश थे कि वह कमजोर पड़े तो मां और बच्चों को कौन समझाएगा। दो दिन पहले ही अपनी बेटी को विदा करके गए पूजा के पापा और मम्मी भी आ गए थे, हर चेहरा दूूसरे से छिपकर अपने आंसुओं को संभाल रहा था। मंगलवार की सुबह जैसे ही दोनो की अर्थियां घर से निकलीं, पूरा भीरा सिसकने लगा, लाल जोड़े में ही पूजा को उसके आखिरी सफर पर विदा किया गया। शारदा नदी के घाट पर एक ही चिता सजाई गई, दोनों को एक ही चिता पर लिटा दिया गया। सबसे छोटे भाई मोहित ने अपने भैया और भाभी को मुखाग्नि दी। दोस्त बदहवास थे बोलेे कि कैसी बदनसीबी जिन कंधों पर अंकुुर को दूल्हा बनाकर उठाया था आज वही कंधे उसके आखिरी सफर में भी रहे।
इंसेट...
शोक में बंद रहा भीरा बाजार, दोपहर बाद खुला
सोमवार की सुबह से ही भीरा की बाजार बंद थी, मंगलवार को अंतिम संस्कार के बाद ही बाजार खुला, लेकिन आज पूरे कस्बे से रौनक गायब थी। कस्बे के अलावा पास के कई स्कूलों में अवकाश कर दिया गया था। कई राजनैतिक पार्टियों के लोग भी अंतिम संस्कार में पहुंचे।