फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला डॉक्टर न होने से महिला और नवजात ने दम तोड़ा

Sat, 27 Feb 2016 10:19 PM IST
बिजुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला सशक्तीकरण की बात करने वाले जिम्मेदारों की नींद आखिर कब टूटेगी। अस्पताल में महिला डॉक्टरों की कमी से आए दिन वक्त पर सही इलाज न मिल पाने से जच्चा-बच्चा बे-मौत मारे जा रहे हैं। गुरुवार को सीएचसी से रेफर हुई गर्भवती महिला की जिले पर मौत हो गई तो अगले दिन सीएचसी पर एक नवजात ने दम तोड़ दिया। दोनो मामले भले अलग हों और डॉक्टरी भाषा में उनके मौत के कारण कुछ और ठहराए जाएं, लेकिन समय रहते महिलाओं को गर्भ के समय मुनासिब इलाज और डॉक्टरी राय मिलता तो ये नौबत नहीं आती।
विज्ञापन

गुरुवार को पल्हनापुर गांव की टीकाराम की गर्भवती पत्नी पुष्पा को दिन में करीब तीन बजे 108 एंबुलेंस से सीएचसी लाया गया था। जेएसवाई रजिस्टर में इस महिला की कोई इंट्री नही है, डॉक्टर भी ऐसी किसी महिला की भर्ती होने से इंकार करते रहे, लेकिन सरकारी एंबुलेंस के आंकड़े बताते हैं कि पुष्पा को न सिर्फ लाया गया बल्कि करीब दो से तीन घंटे तक रोककर इलाज भी किया गया। उसके बाद यहां से रेफर भी किया गया, पुष्पा को फिर 108 एंबुलेंस से ही जिला अस्पताल ले जाया गया। पुष्पा के घर के लोग बताते हैं कि उसे गुरुवार से पहले कई बार अस्पताल दवा दिलाने के लिए ले गए लेकिन वहां पर महिला डॉक्टर न होने से गांवों में ही दिखाना मुनासिब समझा। बाद में उसकी मौत हो गई। वहीं अगले दिन नाथूपुर गांव की अर्चना को प्रसव के लिए लाया गया, करीब 24 घंटे तक उसे सीएचसी में रोका गया, वहां प्रसव के बाद उसके बच्चे की मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें