ग्रामीण पर जानलेवा हमले के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने पिता-पुत्र सहित तीन हमलावरों को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने तीनों पर तेरह-तेरह हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के ग्राम शाहूपुर निवासी छविनाथ के साथ गांव के ही श्रीकृष्ण की लड़की ने बिना मर्जी के शादी कर ली थी, एक माह बाद जब छविनाथ उसे लेकर वापस अपने गांव शाहूपुर आया तो दोनो परिवार के बीच रंजिश बढ़ गई। इसी रंजिश के चलते दो मई 2009 की शाम आठ बजे श्रीकृष्ण,कल्लू और शिवचरन ने अपने साथियों सहित छविनाथ के घर पर धावा बोल दिया। आरोप है हमलावरों ने छविनाथ की गर्दन पर बांके से हमला कर दिया, जिससे छविनाथ बुरी तरह घायल हो गया। मां शिवपति सहित बीच बचाव करने वालों को भी लाठी-डंडो से पीटा गया और मुल्जिमान पक्ष लड़की को वापस लेकर चले गए। अभियोजन नेेे शिवपति, छविनाथ, राधेश्याम, डॉ.केजी गंगवार तथा एसआई सुरेश बहादुर सिंह की गवाही दर्ज क राई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने दोनो पक्षों की सुनवाई के बाद श्रीकृष्ण और उसके लड़के कल्लूू तथा शिवचरन को जानलेवा हमले में दोषी पाते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 13-13 हजार रुपये का जुर्माना डाला है, अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि वसूले गए जुर्माने में से 25 हजार रुपये चोटिल छविनाथ को दिए जाएंगे।