नगर के एचडीएफसी बैंक में किसानों के कृषि लोन के गोलमाल के मामले की रिपोर्ट पुलिस ने एक सप्ताह बाद भी दर्ज नहीं की है, जिससे किसानों में रोष है।
कंधरापुर गांव निवासी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पिता जयराम सिंह व माता बसंती देवी ने कृषि ऋण के लिए आवेदन किया था। ऋण की राशि तो मिली नहीं सात जुलाई को फोन पर किस्त जमा करने के लिए सूचना दी गई। तब उन्हें मालूम हुआ कि लोन स्वीकृत होकर धनराशि 5.31 लाख रुपये का गबन किया जा चुका है। फोन के दूसरे दिन ही उन्होंने बैंक की शाखा प्रबंधक को लिखित शिकायतीपत्र दिया कि उन्हें बैंक से कोई पासबुक और चेकबुक प्रदान नहीं की गई है। प्रार्थनापत्र में उन्होंने प्रकरण की जांच कर दोषियों को दंडित करने की मांग की। नौ जुलाई को उन्होंने कोतवाली गोला में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की लेकिन पुलिस ने तहरीर तो ले ली पर मुकदमा अब तक दर्ज नहीं किया है।
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प्रधान कार्यालय से भेजी जाती है चेक बुक
गोला गोकर्णनाथ। एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक आलोक त्रिवेदी का कहना है कि लोन लेने वाले खाताधारक को चेक बुक बैंक के मुंबई स्थित प्रधान कार्यालय से कोरियर या पंजीकृत डाक से भेजी जाती है। चेकबुक से बिना चेक काटे बैंक शाखा से भुगतान नहीं हो सकता। यह जांच का विषय है कि चेकबुक लोनधारक को मिली या नहीं, चेक पर हस्ताक्षर लोन लेने वाले खाताधारक के हैं या नहीं।
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पुलिस नहीं करती आर्थिक अपराध की जांच
गोला गोकर्णनाथ। कोतवाली पुलिस ने इंद्रजीत सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया है । पुलिस आर्थिक अपराध की जांच मुकदमा दर्ज होने के बाद नहीं कर सकती है। पुलिस द्वारा आर्थिक अपराध के जो भी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं उनमें यह प्रावधान है कि विवेचना का कार्य आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग उप्र लखनऊ को दे दिया जाए। वहां से निरीक्षक को ऐसे मामले की विवेचना के लिए भेजा जाता है, तो फिर बिना मुकदमा दर्ज किए बिना पुलिस ऐसे मामले की जांच कैसे कर रही है। यह जांच का विषय है।